औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में आग की घटनाओं का बढ़ता खतरा : वसई, विरार और नालासोपारा में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में आग की घटनाओं का बढ़ता खतरा : वसई, विरार और नालासोपारा में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

गोदामों और औद्योगिक परिसरों में बार-बार आग लगने से लाखों का नुकसान ; आखिर हादसों के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

लालप्रताप सिंह (कार्यकारी संपादक : सा.यशोमणि) 

वसई-विरार : वसई-विरार शहर के औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। विशेष रूप से वसई, विरार और नालासोपारा के औद्योगिक परिसरों, गोदामों, व्यावसायिक इमारतों तथा छोटे-बड़े कारखानों में बार-बार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन हादसों में जहां लाखों रुपये की संपत्ति जलकर खाक हो जाती है, वहीं कामगारों, कर्मचारियों और आसपास रहने वाले नागरिकों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। आग लगने की कई घटनाओं में शॉर्ट सर्किट, विद्युत उपकरणों में खराबी, ज्वलनशील सामग्री का अनुचित भंडारण तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी जैसी आशंकाएं सामने आती हैं। ऐसे में शहर की अग्निशमन और औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों में आग का बढ़ता जोखिम

वसई पूर्व स्थित वालिव औद्योगिक क्षेत्र वसई-विरार के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में कारखाने, गोदाम, उत्पादन इकाइयां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। इसी तरह विरार और नालासोपारा के विभिन्न हिस्सों में भी औद्योगिक गोदामों, वर्कशॉप और व्यावसायिक परिसरों का विस्तार हुआ है।

इन स्थानों पर कई प्रकार की मशीनरी, विद्युत उपकरण, प्लास्टिक, रसायन, पैकेजिंग सामग्री, कपड़े, कागज और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का इस्तेमाल या भंडारण किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में बिजली की छोटी-सी खराबी भी बड़े अग्निकांड का रूप ले सकती है।

विशेष चिंता की बात यह है कि कई औद्योगिक परिसरों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, विद्युत वायरिंग की स्थिति, आपातकालीन निकास मार्ग और आग बुझाने की वैकल्पिक व्यवस्था की नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से होती है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

शॉर्ट सर्किट या सुरक्षा में लापरवाही, आखिर असली वजह क्या?

औद्योगिक और वाणिज्यिक परिसरों में आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट एक संभावित कारण माना जाता है। पुराने विद्युत तार, क्षमता से अधिक बिजली का उपयोग, खराब इलेक्ट्रिकल पैनल, अनधिकृत विद्युत कनेक्शन और मशीनों पर बढ़ता लोड आग का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, कई परिसरों में ज्वलनशील सामग्री का अत्यधिक भंडारण, अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव नहीं होना, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों की कमी और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होना भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

हालांकि, प्रत्येक आग की घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और अग्नि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही होनी चाहिए। केवल शॉर्ट सर्किट बताकर मामले को समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है। आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा नियमों के पालन और संभावित लापरवाही की भी जांच आवश्यक है।

अग्निशमन व्यवस्था की तत्परता और संसाधनों पर सवाल

आग लगने के बाद दमकल विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास करती है। लेकिन औद्योगिक परिसरों में आग की तीव्रता, संकरी सड़कें, गोदामों में रखी ज्वलनशील सामग्री और पानी की पर्याप्त उपलब्धता जैसी चुनौतियां राहत एवं बचाव कार्य को कठिन बना सकती हैं। कई बार आग पर पूरी तरह काबू पाने में लंबा समय लग जाता है। इस दौरान आग आसपास की इमारतों या अन्य गोदामों तक फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सवाल केवल दमकल विभाग की प्रतिक्रिया का नहीं, बल्कि पूरे अग्नि सुरक्षा तंत्र की तैयारी का है। क्या संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त अग्निशमन संसाधन उपलब्ध हैं? क्या नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाती है? क्या दमकल वाहनों के लिए औद्योगिक परिसरों तक पहुंचने के रास्ते हमेशा खुले रहते हैं? इन सभी पहलुओं की समीक्षा जरूरी है।

फायर एनओसी और सुरक्षा ऑडिट की हो नियमित जांच

औद्योगिक और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित प्राधिकरणों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। केवल फायर एनओसी प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिसर में वास्तविक रूप से अग्निशमन व्यवस्था कार्यरत है या नहीं, इसकी समय-समय पर जांच भी होनी चाहिए।

प्रशासन को निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है:

  1. सभी औद्योगिक गोदामों और कारखानों का नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।

  2. विद्युत वायरिंग, ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रिकल पैनल की तकनीकी जांच अनिवार्य की जाए।

  3. अग्निशमन यंत्रों, स्प्रिंकलर और फायर हाइड्रेंट की कार्यक्षमता की जांच हो।

  4. आपातकालीन निकास मार्गों को हमेशा खुला रखा जाए।

  5. ज्वलनशील रसायनों और अन्य खतरनाक सामग्रियों के भंडारण के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

  6. कामगारों और कर्मचारियों को आग से बचाव तथा आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण दिया जाए।

  7. नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

आग के बाद मुआवजा, लेकिन नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

आग लगने की घटनाओं में सबसे ज्यादा नुकसान उन व्यापारियों और उद्यमियों को उठाना पड़ता है, जिनकी वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई इकाइयां कुछ ही घंटों में राख हो जाती हैं। इसके साथ ही वहां काम करने वाले मजदूरों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो जाता है। कई मामलों में मशीनरी, कच्चा माल, तैयार उत्पाद और महत्वपूर्ण व्यावसायिक दस्तावेज नष्ट हो जाते हैं। यदि किसी हादसे में जनहानि होती है तो उसका नुकसान अपूरणीय होता है। इसलिए आग लगने के बाद राहत कार्य और नुकसान के आकलन तक सीमित रहने के बजाय ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना जरूरी है।

प्रशासन की जवाबदेही तय करना समय की मांग

वालिव, विरार और नालासोपारा के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में आग की घटनाओं को केवल आकस्मिक दुर्घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी परिसर में सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण आग लगती है, तो संबंधित प्रतिष्ठान संचालक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, नियमित निरीक्षण और नियमों के क्रियान्वयन में लापरवाही सामने आने पर संबंधित विभागों की जवाबदेही भी निर्धारित की जानी चाहिए। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के अग्निशमन विभाग के साथ-साथ संबंधित औद्योगिक, विद्युत और सुरक्षा प्राधिकरणों को संयुक्त रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण करना चाहिए। विशेष रूप से उन गोदामों और कारखानों की पहचान की जानी चाहिए, जहां ज्वलनशील सामग्री का बड़े पैमाने पर भंडारण होता है।

अब हादसों के बाद नहीं, हादसों से पहले जागने की जरूरत

वसई-विरार तेजी से विकसित होता औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां रोजगार, व्यापार और उद्योगों के विस्तार के साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। बार-बार आग लगने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अग्नि सुरक्षा को केवल कागजी औपचारिकता बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े अग्निकांड और जनहानि का इंतजार कर रहा है? क्या औद्योगिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा की जांच किसी गंभीर दुर्घटना के बाद ही होगी?

आवश्यकता इस बात की है कि वालिव, विरार और नालासोपारा के सभी संवेदनशील औद्योगिक एवं वाणिज्यिक परिसरों का विशेष अग्नि सुरक्षा अभियान चलाकर निरीक्षण किया जाए। क्योंकि आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियां भेजना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन आग लगने की नौबत ही न आए, ऐसी व्यवस्था करना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।

सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि किसी परिवार की जिंदगी उजड़ना भी हो सकता है। इसलिए अब कार्रवाई का इंतजार नहीं, बल्कि समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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