संपादकीय : शिवसेना की पहचान पर अमित शाह की मुहर...
शिवसेना की पहचान पर अमित शाह की मुहर... महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों से अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कभी बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द संगठित रहने वाली शिवसेना आज दो प्रमुख धड़ों में विभाजित दिखाई देती है। एक ओर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला समूह है, जबकि दूसरी ओर उद्धव ठाकरे का गुट अपनी राजनीतिक और वैचारिक पहचान बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में अमित शाह का यह कहना कि "शिवसेना सिर्फ एक ही है" और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, महज चुनावी भाषण नहीं माना जा सकता। यह बयान उस राजनीतिक वास्तविकता को रेखांकित करता है जिसे चुनाव आयोग और कई संवैधानिक प्रक्रियाओं के बाद स्थापित किया गया है। भाजपा और शिंदे गुट लंबे समय से यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मूल शिवसेना अब शिंदे के नेतृत्व में ही कार्य कर रही है। हालांकि राजनीति केवल कानूनी मान्यता का विषय नहीं होती। किसी भी दल की पहचान उसके कार्यकर्ताओं, समर्थकों और वैचारिक आधार से भी निर्मित होती है। उद्धव ठाकरे का गुट लगातार यह दावा करता रहा है कि वह बालासाहेब ठाकरे की म...