डिग्रियां हासिल करना शिक्षा नहीं, बल्कि सही-गलत की पहचान और मानवीय मूल्यों को समझना ही वास्तविक शिक्षा है।
डिग्रियां हासिल करना शिक्षा नहीं, बल्कि सही-गलत की पहचान और मानवीय मूल्यों को समझना ही वास्तविक शिक्षा है। संपादकीय | यशोमणि न्यूज़ आज के दौर में शिक्षा का अर्थ अक्सर बड़ी-बड़ी डिग्रियों, ऊंचे पदों, अंग्रेजी भाषा के ज्ञान और आर्थिक सफलता तक सीमित होकर रह गया है। समाज में किसी व्यक्ति की योग्यता का आकलन उसकी शैक्षणिक डिग्रियों और पेशेवर उपलब्धियों से किया जाता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या अधिक पढ़-लिख लेना ही शिक्षित होने की निशानी है? क्या डिग्रियों का ढेर किसी व्यक्ति को विवेकशील, संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बना सकता है? वास्तविकता यह है कि साक्षर होना और शिक्षित होना दोनों बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं। साक्षर व्यक्ति वह है जो पढ़ना-लिखना जानता है, शब्दों को समझ सकता है और लिखित जानकारी का उपयोग कर सकता है। लेकिन शिक्षित व्यक्ति वह है जो अपने ज्ञान का उपयोग सही निर्णय लेने, समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारने के लिए करता है। विडंबना देखिए कि आज समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिनके पास बड़ी-बड़ी डिग्रिय...