बर्मा सेल पेट्रोल पंप के पीछे नाईक पाड़ा में औद्योगिक इमारत पर कथित अवैध पत्राशेड व पोटमाळा निर्माण का आरोप; कार्रवाई को लेकर सहायक आयुक्त निलेश म्हात्रे और अभियंता शिवकुमार सूर्यवंशी की भूमिका पर उठे सवाल

सातिवली स्थित नाईक पाड़ा में कथित अवैध निर्माण पर मनपा की चुप्पी! संदेहास्पद...

बर्मा सेल पेट्रोल पंप के पीछे नाईक पाड़ा में औद्योगिक इमारत पर कथित अवैध पत्राशेड व पोटमाळा निर्माण का आरोप; कार्रवाई को लेकर सहायक आयुक्त निलेश म्हात्रे और अभियंता शिवकुमार सूर्यवंशी की भूमिका पर उठे सवाल

वसई (लालप्रताप सिंह) : वसई-विरार शहर महानगरपालिका के प्रभाग समिति ‘जी’ कार्यक्षेत्र सातिवली स्थित तुंगारफाटा के समीप बर्मा सेल पेट्रोल पंप के पीछे नाईक पाड़ा क्षेत्र में एक औद्योगिक इकाई की इमारत में कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि संबंधित इमारत में बिना आवश्यक अनुमति के पत्राशेड और पोटमाळा (मेझेनाइन फ्लोर) का निर्माण किया गया है। बताया जा रहा है कि औद्योगिक उपयोग के लिए बनी उक्त इमारत में निर्माण के स्वरूप में कथित बदलाव किए जाने के बावजूद मनपा प्रशासन की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेष रूप से प्रभाग समिति ‘जी’ के संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं में नाराजगी की चर्चा है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

कथित अवैध निर्माण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण वास्तव में बिना अनुमति अथवा स्वीकृत नकाशे के विपरीत किया गया है, तो मनपा प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? निर्माण कार्य दिखाई देने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में छोटे-मोटे निर्माणों पर मनपा का दस्ता तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों से जुड़े अथवा बड़े औद्योगिक परिसरों में कार्रवाई की गति अचानक धीमी क्यों पड़ जाती है, यह जांच का विषय है।

अधिकारी कार्रवाई से क्यों कतरा रहे हैं?

इस मामले में मनपा के सह आयुक्त निलेश म्हात्रे तथा अभियंता शिवकुमार सूर्यवंशी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संबंधित स्थल पर कथित अनधिकृत निर्माण की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित तत्परता दिखाई नहीं दे रही है।ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मनपा के रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

‘मैनेजमेंट’ की चर्चाओं से बढ़ा संदेह

शहर में अवैध निर्माणों को लेकर समय-समय पर ‘मैनेजमेंट’ और आर्थिक लेन-देन के आरोप सामने आते रहे हैं। नाईक पाड़ा के इस मामले में भी स्थानीय स्तर पर इसी प्रकार की चर्चाएं होने की बात कही जा रही है। सवाल यह है कि यदि संबंधित निर्माण नियमों के विपरीत है, तो क्या किसी अधिकारी या राजनीतिक/प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव के कारण कार्रवाई रोकी जा रही है? या फिर संबंधित निर्माण को लेकर मनपा प्रशासन के पास ऐसी कोई वैध अनुमति या दस्तावेज मौजूद हैं, जिसके आधार पर निर्माण को नियमसंगत माना जा रहा है?

इन सभी सवालों का जवाब मनपा प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

स्वीकृत नकाशे और मौके की स्थिति की हो जांच

मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित औद्योगिक इमारत के स्वीकृत नकाशे, बांधकाम अनुमति, कंप्लीशन/ऑक्युपेंसी संबंधी दस्तावेज, पत्राशेड की अनुमति तथा पोटमाळा निर्माण की वैधता की जांच आवश्यक है। इसके साथ ही मनपा के भवन विभाग द्वारा मौके का पंचनामा कर वर्तमान निर्माण और स्वीकृत प्लान की तुलना की जानी चाहिए। यदि निर्माण स्वीकृत अनुमति के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित कानूनों के तहत नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा है। वहीं यदि निर्माण वैध है, तो मनपा प्रशासन को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर उठ रहे सवालों पर विराम लगाना चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि मामले की जांच केवल उन्हीं अधिकारियों के भरोसे न छोड़ी जाए, जिनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र टीम के माध्यम से स्थल निरीक्षण कर पूरी रिपोर्ट तैयार की जाए। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नाईक पाड़ा स्थित औद्योगिक इमारत में कथित अवैध पत्राशेड और पोटमाळा निर्माण हुआ है, तो कार्रवाई में देरी किस वजह से हो रही है? 

क्या मनपा प्रशासन को कोई दबाव है, या फिर अधिकारियों की नजर में निर्माण वैध है? इन सवालों का स्पष्ट उत्तर सामने आना अब जरूरी हो गया है।

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