मनपा अधिकारियों की संदिग्ध कार्यशैली के विरोध में मनपा मुख्यालय पर मनसे का ‘भीख मांगो’ आंदोलन
मनपा अधिकारियों की संदिग्ध कार्यशैली के विरोध में मनसे का ‘भीख मांगो’ आंदोलन
मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने जताया आक्रोश; मनसे के एकमात्र नगरसेवक प्रफुल्ल पाटिल भी आंदोलन में रहे मौजूद
विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की कथित संदिग्ध कार्यशैली और विभिन्न नागरिक समस्याओं को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मंगलवार को मनपा मुख्यालय के समक्ष जोरदार ‘भीख मांगो’ आंदोलन किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने हाथों में कटोरे लेकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि नागरिकों की समस्याओं तथा मनपा के कामकाज से जुड़े गंभीर मुद्दों पर प्रशासन की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है। इस आंदोलन में मनसे के वसई-विरार शहर मनपा के एकमात्र नगरसेवक प्रफुल्ल पाटिल भी उपस्थित रहे। कार्यकर्ताओं ने मनपा प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिकारियों की कथित कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि मनपा प्रशासन नागरिकों से विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क वसूलता है, लेकिन उसके अनुरूप मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती।
अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मनसे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मनपा के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पारदर्शी नहीं है और कई मामलों में शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती। शहर में सड़क, सफाई, यातायात, जलनिकासी, अवैध निर्माण तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर नागरिकों में असंतोष है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप मनसे ने लगाया। आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से राहगीरों और नागरिकों से भीख मांगकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। मनसे का कहना था कि यदि मनपा प्रशासन नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता, तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन के माध्यम से प्रशासन को जवाबदेह बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
‘जनता के पैसों का सही इस्तेमाल हो’
मनसे नेताओं ने कहा कि महानगरपालिका को मिलने वाला निधि और नागरिकों से वसूला जाने वाला कर जनता की सुविधाओं के लिए खर्च होना चाहिए। यदि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही, अनियमितता अथवा संदिग्ध कार्यशैली के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। नगरसेवक प्रफुल्ल पाटिल की मौजूदगी से आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। इस दौरान मनसे कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि मनपा प्रशासन के कामकाज पर निगरानी रखना और नागरिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना उनका दायित्व है।
आंदोलन से मनपा प्रशासन पर बढ़ा दबाव
मनसे के इस अनोखे आंदोलन के चलते मनपा मुख्यालय परिसर में कुछ समय के लिए राजनीतिक माहौल गरम रहा। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की। आंदोलन के माध्यम से मनसे ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि नागरिक समस्याओं और प्रशासनिक कामकाज को लेकर वह आने वाले दिनों में भी आक्रामक रुख अपना सकती है।
मनपा प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और संबंधित शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

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