नाट्यगृह और क्रीड़ा संकुल के उद्घाटन पर सियासी संग्राम, मनपा आयुक्त को आज रात तक का अल्टीमेटम... विरोधी पक्षनेता ने दी चेतावनी
नाट्यगृह और क्रीड़ा संकुल के उद्घाटन पर सियासी संग्राम, मनपा आयुक्त को आज रात तक का अल्टीमेटम...
विरोधी पक्षनेता ने दी चेतावनी; आचोले नाट्यगृह और बोळींज क्रीड़ा संकुल के उद्घाटन को लेकर विवाद
वसई : वसई-विरार शहर महानगरपालिका एवं शासन के सार्वजनिक निधि से निर्मित आचोले स्थित नाट्यगृह और बोळींज स्थित क्रीड़ा संकुल के उद्घाटन को लेकर प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। महानगरपालिका के विरोधी पक्षनेता ने आयुक्त से शुक्रवार, 2 अक्टूबर की रात तक इस पूरे मामले में महानगरपालिका की अधिकृत भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही समाधानकारक खुलासा अथवा आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर शनिवार, 3 अक्टूबर को भाजपा की ओर से लोकप्रतिनिधियों एवं नागरिकों की मौजूदगी में दोनों सार्वजनिक वास्तुओं के लोकार्पण को लेकर आगे की भूमिका तय करने की चेतावनी दी है। विरोधी पक्षनेता के अनुसार, आचोले का नाट्यगृह पिछले करीब 12 वर्षों से तथा बोळींज का क्रीड़ा संकुल करीब 9 वर्षों से लंबित था। इन दोनों परियोजनाओं का काम पूरा कर उन्हें नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने के लिए भाजपा के विधायक राजन नाईक और विधायक स्नेहा दुबे पंडित तथा महानगरपालिका में विपक्ष के नगरसेवकों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे थे। बताया गया है कि 3 अक्टूबर 2026 को दोनों वास्तुओं के उद्घाटन की योजना को लेकर महापौर की ओर से पत्र जारी किए जा रहे हैं। हालांकि, इस कार्यक्रम की प्रशासनिक अधिकृतता, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी, महानगरपालिका की आधिकारिक कार्यक्रम सूची तथा शासन के राजशिष्टाचार के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में विधायक स्नेहा दुबे पंडित और विधायक राजन नाईक ने महानगरपालिका प्रशासन से स्वतंत्र पत्राचार कर पूरे प्रकरण की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने महानगरपालिका आयुक्त के साथ ही महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग तथा जिलाधिकारी को भी लिखित निवेदन भेजकर वस्तुस्थिति की तत्काल जांच करने और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
‘सार्वजनिक वास्तुएं जनता की संपत्ति’
विरोधी पक्षनेता ने कहा कि सार्वजनिक धन से निर्मित नाट्यगृह और क्रीड़ा संकुल किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वसई-विरार की जनता की संपत्ति हैं। इसलिए इनके लोकार्पण की प्रक्रिया में प्रशासनिक नियमों, पारदर्शिता और शासन के राजशिष्टाचार का पालन किया जाना आवश्यक है। महानगरपालिका आयुक्त से मांग की गई है कि वे 2 अक्टूबर की रात तक दोनों विधायकों द्वारा भेजे गए पत्रों की दखल लेकर इस मामले में महानगरपालिका की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करें तथा आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करें।
‘संघर्ष नहीं, नियमों के तहत जनता के लिए उद्घाटन’
विरोधी पक्ष की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का संघर्ष खड़ा करना नहीं है। सार्वजनिक निधि से निर्मित दोनों वास्तुओं को जल्द से जल्द नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जाए और उनके उद्घाटन की पूरी प्रक्रिया नियमों, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा शासन के राजशिष्टाचार के अनुरूप हो, यही उनकी मांग है।
हालांकि, आयुक्त की ओर से शुक्रवार रात तक कोई समाधानकारक स्पष्टीकरण या आवश्यक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 3 अक्टूबर को भाजपा, लोकप्रतिनिधियों और वसई-विरार के नागरिकों की मौजूदगी में दोनों सार्वजनिक वास्तुओं के लोकार्पण को लेकर आगे की भूमिका तय करने की घोषणा से मामला राजनीतिक रूप से गरमाने के आसार हैं। अब महानगरपालिका प्रशासन इस पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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