तुंगारफाटा में कथित अवैध निर्माण पर सवाल, मनपा की कार्रवाई पर उठी उंगली...
तुंगारफाटा में कथित अवैध निर्माण पर सवाल, मनपा की कार्रवाई पर उठी उंगली
गिदराई पाड़ा में करीब 2,000 वर्गफीट निर्माण का आरोप; पर्यावरणीय नुकसान और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर उठे सवाल
वसई : वसई-विरार शहर मनपा प्रभाग समिति ‘जी’ के अंतर्गत तुंगारफाटा स्थित गिदराई पाड़ा, शनि मंदिर के पास मंगलमूर्ति सोसाइटी से सटे क्षेत्र में करीब 2,000 वर्गफीट में कथित अनधिकृत निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान मनपा के निर्धारित नियमों और पर्यावरण संबंधी प्रावधानों की अनदेखी की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित स्थल पर निर्माण कार्य को लेकर पहले से चर्चा और शिकायतें होने के बावजूद अब तक मनपा प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इससे अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ मनपा की कार्रवाई की प्रक्रिया और उसकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निर्माण को लेकर कई सवाल
आरोप है कि उक्त परिसर में करीब 2,000 वर्गफीट क्षेत्र में निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया है। निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति, मंजूर नक्शा, जमीन का उपयोग तथा अन्य वैधानिक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की दस्तावेजी जांच और स्थल निरीक्षण किए जाने की आवश्यकता है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि निर्माण के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विभागों द्वारा पर्यावरणीय नियमों के तहत भी जांच किए जाने की आवश्यकता होगी।
‘दबंगई के प्रभाव’ का आरोप
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और दबंगई के प्रभाव जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण होगा कि मनपा प्रशासन निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि संबंधित निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति जारी की गई थी या नहीं और यदि निर्माण अनधिकृत है तो अब तक उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कार्रवाई पर निगाह
वसई-विरार शहर में अनधिकृत निर्माणों को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में तुंगारफाटा के गिदराई पाड़ा स्थित कथित निर्माण का मामला भी मनपा के लिए प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के समान अनुपालन की कसौटी बन गया है। अब स्थानीय नागरिकों की नजर प्रभाग समिति ‘जी’ के संबंधित अधिकारियों पर है कि वे मौके का निरीक्षण कर निर्माण की वैधता, जमीन के उपयोग, स्वीकृत अनुमति और पर्यावरणीय पहलुओं की जांच करते हैं या नहीं। यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
फिलहाल, मामले में मनपा प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई अथवा संबंधित निर्माणकर्ता का पक्ष सामने नहीं आया है। मनपा की जांच और आधिकारिक जवाब के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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