वसई पूर्व में इलाज के बाद 8 वर्षीय बच्ची की मौत, कथित बोगस डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज....
इलाज के बाद 8 वर्षीय बच्ची की मौत, कथित बोगस डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज....
वसई पूर्व के भोयदापाड़ा की घटना से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल ; पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण
वसई : वसई-विरार क्षेत्र में कथित रूप से अनधिकृत तरीके से चिकित्सा उपचार किए जाने के बाद 8 वर्षीय बच्ची की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। वसई पूर्व के भोयदापाड़ा निवासी बच्ची को उल्टी की शिकायत के बाद राजावली के एक निजी क्लिनिक में ले जाया गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां उपचार के दौरान गोलियां देने के साथ दो इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ी और अगले दिन उसकी मौत हो गई। मामले में वसई-विरार शहर महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर वालीव पुलिस ने संबंधित चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
उल्टी की शिकायत पर क्लिनिक ले जाया गया
जानकारी के मुताबिक, भोयदापाड़ा निवासी मरियम मोहम्मद अंसारी (8) को 28 सितंबर की रात करीब 8:30 बजे उल्टियां शुरू हुईं। बच्ची की हालत को देखते हुए उसकी मां उसे राजावली, पालनगर स्थित राहुल क्लिनिक लेकर पहुंचीं। वहां कथित तौर पर धूपचंद निषाद (42) ने बच्ची की जांच की और कुछ दवाइयां देने के साथ दोनों बाजुओं में इंजेक्शन लगाए।परिजनों के अनुसार, अगले दिन सुबह बच्ची की हालत अचानक बिगड़ गई। उसके नाक और मुंह से रक्तस्राव होने लगा और कुछ ही समय बाद उसने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद परिवार की ओर से उपचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए और संबंधित चिकित्सक पर गलत उपचार का आरोप लगाया गया। हालांकि, बच्ची की मौत सीधे तौर पर इंजेक्शन अथवा उपचार के कारण हुई या नहीं, यह अभी चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
मनपा स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या सामने आया?
घटना के बाद वसई-विरार मनपा के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संबंधित क्लिनिक का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, धूपचंद निषाद स्वयं को इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का चिकित्सक बताता था, लेकिन उसके पास महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल से मान्य पंजीकरण अथवा मान्यताप्राप्त चिकित्सा डिग्री नहीं होने की बात जांच में सामने आई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसे चिकित्सक को एलोपैथिक दवाइयां लिखने अथवा इंजेक्शन लगाने की अनुमति नहीं होती। निरीक्षण के दौरान मनपा की टीम ने क्लिनिक से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां तथा इस्तेमाल की हुई और टूटी हुई इंजेक्शन की शीशियां भी जब्त कीं। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
मनपा के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. श्रीनिवास दुधमल की शिकायत के आधार पर वालीव पुलिस ने संबंधित चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत कथित धोखाधड़ी तथा महाराष्ट्र में बिना अधिकृत अनुमति चिकित्सा व्यवसाय करने से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं। पुलिस ने आरोपी को नोटिस भी जारी किया है। वालीव पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक प्रदीप केरकर के अनुसार, बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। विसरा रिपोर्ट भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी और इसी के आधार पर मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण तथा उपचार की भूमिका को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
‘गलत इलाज’ के आरोपों की होगी जांच
इस घटना ने वसई-विरार क्षेत्र में बिना उचित चिकित्सकीय पंजीकरण के संचालित होने वाले क्लिनिकों और कथित रूप से अनधिकृत चिकित्सा प्रैक्टिस को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम-विसरा रिपोर्ट आने से पहले बच्ची की मौत के लिए उपचार को निश्चित रूप से जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। फिलहाल पुलिस और मनपा स्वास्थ्य विभाग की जांच इस बात पर केंद्रित है कि संबंधित व्यक्ति के पास किस प्रकार की चिकित्सा योग्यता थी, उसे एलोपैथिक दवाइयां और इंजेक्शन देने की वैधानिक अनुमति थी या नहीं तथा बच्ची को दिए गए उपचार और उसकी मृत्यु के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं।

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