पालघर के किसानों को बड़ी राहत: नारियल पर ₹1.70 लाख और सुपारी पर ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर का बीमा संरक्षण
पालघर के किसानों को बड़ी राहत: नारियल पर ₹1.70 लाख और सुपारी पर ₹1 लाख प्रति हेक्टेयर का बीमा संरक्षण
मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना में शामिल हुए नारियल और सुपारी के बागान; 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीकरण का मौका, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश भागेश्वर की किसानों से अपील
पालघर : बदलते मौसम, तेज हवाओं और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पालघर जिले में नारियल और सुपारी की फसलों को मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत नारियल की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लाख 70 हजार रुपये, जबकि सुपारी की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये का बीमा संरक्षण निर्धारित किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीकरण कराना अनिवार्य है। जिले में नारियल और सुपारी की खेती करने वाले किसानों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मौसम में होने वाले अप्रत्याशित बदलावों के कारण बागानों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में बीमा योजना के माध्यम से फसल जोखिम को कम करने और किसानों को संभावित नुकसान से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
नारियल और सुपारी के बीमा के लिए कितना देना होगा प्रीमियम?
मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना के अंतर्गत दोनों फसलों के लिए बीमा संरक्षण और प्रीमियम की राशि निर्धारित की गई है।
नारियल की फसल: प्रति हेक्टेयर 1,70,000 रुपये का बीमा संरक्षण। इसके लिए 8,500 रुपये प्रीमियम निर्धारित है।
सुपारी की फसल: प्रति हेक्टेयर 1,00,000 रुपये का बीमा संरक्षण। इसके लिए 5,000 रुपये प्रीमियम निर्धारित है।
इस योजना के तहत किसानों को अपनी फसल के निर्धारित बीमा संरक्षण के अनुसार प्रीमियम भरकर पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, बीमा संरक्षण की निर्धारित राशि को सीधे मिलने वाला मुआवजा नहीं समझना चाहिए। वास्तविक बीमा भुगतान संबंधित योजना की शर्तों, निर्धारित मौसम मानकों और नुकसान के आकलन के आधार पर होगा।
पंजीकरण के लिए Farmer ID और ई-फसल निरीक्षण जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को आवश्यक दस्तावेजों और अभिलेखों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए Farmer ID और ई-फसल निरीक्षण का रिकॉर्ड अनिवार्य बताया गया है। जिन किसानों ने अभी तक आवश्यक अभिलेख पूरे नहीं किए हैं, उन्हें समय रहते इसकी पूर्ति कर लेनी चाहिए, ताकि पंजीकरण के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग की ओर से किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपनी पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और प्रीमियम संबंधी जानकारी की पुष्टि कर लें।
तेज हवाओं से फसल को नुकसान होने पर 72 घंटे में सूचना देना जरूरी
बीमा योजना के अंतर्गत नुकसान की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से तेज हवाओं के कारण फसल को नुकसान पहुंचने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को इसकी सूचना देनी होगी। समय पर सूचना देने से नुकसान की जानकारी दर्ज कराने और बीमा संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसलिए किसानों को नुकसान होने की स्थिति में देरी नहीं करनी चाहिए और बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित सूचना एवं दावा प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी की किसानों से अपील
पालघर के जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश भागेश्वर ने जिले के नारियल और सुपारी उत्पादक किसानों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने किसानों से निर्धारित समयसीमा के भीतर पंजीकरण पूरा करने तथा आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने का आग्रह किया है। किसानों को योजना से संबंधित अधिक जानकारी, पंजीकरण प्रक्रिया और अन्य आवश्यक विवरण प्राप्त करने के लिए बीमा कंपनी के प्रतिनिधि रमेश भरकड (मोबाइल नंबर: 9325220002) से संपर्क करने की जानकारी दी गई है।
समयसीमा का रखें ध्यान, नुकसान से बचाव की तैयारी करें
पालघर जिले में नारियल और सुपारी की खेती करने वाले किसानों के लिए 31 अक्टूबर की समयसीमा महत्वपूर्ण है। बीमा योजना में समय पर पंजीकरण कराने के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता और नुकसान की सूचना देने की निर्धारित प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है।
किसानों को सलाह है कि वे 31 अक्टूबर 2026 से पहले पंजीकरण कराएं और प्रीमियम, पात्रता, बीमा शर्तों तथा दावा प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग से कर लें। इससे योजना का लाभ लेने के दौरान संभावित तकनीकी और प्रक्रियागत परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी।

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