मेहनत और हौसले से अनन्य ने रचा सफलता का इतिहास CSIR-UGC NET जून 2026 में देशभर में 29वां स्थान, JRF के लिए चयन ; मां की मेहनत को दिया सफलता का श्रेय

मेहनत और हौसले से अनन्य ने रचा सफलता का इतिहास

CSIR-UGC NET जून 2026 में देशभर में 29वां स्थान, JRF के लिए चयन ; मां की मेहनत को दिया सफलता का श्रेय

जौनपुर (ओ पी तिवारी) : हौसला बुलंद हो और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कठिन से कठिन मंजिल भी आसान हो जाती है। इस कहावत को साकार कर दिखाया है सुईथाकला अहियाई गांव, ईसापुर पोस्ट निवासी सरिता पांडे के पुत्र अनन्य ने। आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों की चुनौतियों के बावजूद कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अनन्य ने CSIR-UGC NET जून 2026 की परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए देशभर में 29वां स्थान प्राप्त किया है। उनका चयन जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए भी हुआ है।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी स्कोर कार्ड के अनुसार अनन्य ने 99.21 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। हजारों अभ्यर्थियों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 29वां स्थान प्राप्त करना उनकी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण माना जा रहा है।

अनन्य ने पृथ्वी, वायुमंडलीय, महासागर एवं ग्रह विज्ञान विषय से परीक्षा में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि के बाद उनके गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिजनों, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने अनन्य को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

मां की मेहनत को दिया सफलता का श्रेय

अनन्य अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां सरिता पांडे को देते हैं। उनका कहना है कि आज वे जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसके पीछे उनकी मां का संघर्ष, त्याग और कठिन परिश्रम सबसे बड़ी वजह है।

सरिता पांडे पढ़ी-लिखी होने के साथ ही शिक्षा के महत्व को समझती थीं। उन्होंने सरस्वती पूजा-विधि और ट्यूशन पढ़ाकर मिलने वाले पारिश्रमिक से अपने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अनन्य की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। मां के इसी संघर्ष और प्रोत्साहन ने अनन्य को लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

अनन्य कहते हैं कि मां ने स्वयं संघर्ष करते हुए उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया और हर परिस्थिति में पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। यही वजह है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

अब पीएचडी की दिशा में बढ़ रहे कदम

राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद अनन्य का लक्ष्य अब शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। वर्तमान में वह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में भूगर्भ विज्ञान विषय से पीएचडी कर रहे हैं। वह डॉ. नीरज अवस्थी के निर्देशन में शोध कार्य कर रहे हैं।

अनन्य की शैक्षणिक उपलब्धियों का सिलसिला इससे पहले भी जारी रहा है। उन्हें पूर्व में राज्यपाल के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त होने का गौरव भी हासिल हो चुका है। अब CSIR-UGC NET में शानदार प्रदर्शन और JRF के लिए चयन ने उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा

अनन्य की सफलता केवल उनके परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के उन तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण बड़े सपने देखने से हिचकते हैं। अनन्य ने यह साबित किया है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और मेहनत के रास्ते की स्थायी बाधा नहीं बन सकती।

एक ओर मां सरिता पांडे ने अपने बेटे की शिक्षा के लिए ट्यूशन और अन्य कार्यों से मिलने वाले पारिश्रमिक को उसकी पढ़ाई में लगाया, वहीं दूसरी ओर अनन्य ने उस संघर्ष को अपनी मेहनत की ताकत बना लिया। परिणामस्वरूप देशभर के अभ्यर्थियों के बीच 29वां स्थान हासिल कर उन्होंने अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया।

अनन्य की यह उपलब्धि इस संदेश को मजबूती देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिवार का साथ मिले तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर असाधारण सफलता हासिल की जा सकती है।

Comments

Popular posts from this blog

वसई-विरार शहर मनपा क्षेत्र में अब शेयर्ड रिक्शा के साथ मीटर्ड रिक्शा भी शुरू किए जाएंगे - वसई की संघर्षशील विधायक स्नेहा दुबे पंडित की मांग स्वीकार

नालासोपारा स्टेशन के पास गंदे पानी में चाय की केतलियां धोने का वीडियो वायरल, खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल...

नालासोपारा विरार लिंक रोड़ पर तेज रफ्तार कार ने पुलिस वाहन को मारी टक्कर, 3 से 4 लोग गंभीर रूप से घायल