अवैध/अनियमित निर्माण पर मनपा का नया सख्त रुख, लाखों रुपयों के दंड का प्रावधान
अवैध/अनियमित निर्माण पर मनपा का नया सख्त रुख
निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल और वायु प्रदूषण व नियमों का उल्लंघन पड़ेगा महंगा, स्टॉप-वर्क नोटिस से लेकर लाखों रुपये के दंड तक होगी कार्रवाई
वसई-विरार : शहर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों के बीच उनसे उत्पन्न होने वाले धूलकण और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मनपा ने अब सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया है। निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने वाले विकासकों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ स्टॉप-वर्क नोटिस जारी करने के साथ लाखों रुपये तक का आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था लागू की जाएगी। मनपा के इस निर्णय से निर्माण कार्यों के दौरान नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने की संभावना है।
मनपा प्रशासन के अनुसार, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, खुले में रखी निर्माण सामग्री, मलबे का अनुचित भंडारण तथा निर्माण वाहनों से सड़कों पर फैलने वाली मिट्टी शहर के वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित उपायों को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
ग्रीन नेट और शेड लगाना अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत निर्माणाधीन इमारतों तथा संबंधित क्षेत्रों में ग्रीन नेट अथवा उपयुक्त शेड लगाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थल से धूल और बारीक कणों को आसपास के रिहायशी क्षेत्रों तथा सार्वजनिक मार्गों तक पहुंचने से रोकना है।
निर्माण सामग्री को खुले में इस तरह रखने पर भी कार्रवाई की जा सकती है, जिससे हवा के साथ धूल आसपास फैलती हो। प्रशासन द्वारा निर्माण स्थलों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने और धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए जाएंगे।
निर्माण वाहनों के टायर धोना जरूरी
निर्माण स्थल से बाहर निकलने वाले ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहनों के पहियों पर मिट्टी अथवा निर्माण सामग्री चिपकी होने से सड़क पर गंदगी और धूल फैलती है। इसे रोकने के लिए निर्माण स्थलों से बाहर निकलने से पहले वाहनों के टायर धोने की व्यवस्था करने का प्रावधान किया गया है।
मनपा का मानना है कि इस व्यवस्था से निर्माण स्थलों से मुख्य सड़कों पर आने वाली मिट्टी और धूल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
नियमों की अनदेखी पर स्टॉप-वर्क
निर्माण स्थल पर निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपाय नहीं पाए जाने पर संबंधित विकासक को नोटिस दिया जाएगा। गंभीर अथवा बार-बार नियमों का उल्लंघन पाए जाने की स्थिति में स्टॉप-वर्क कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर लाखों रुपये तक का दंड भी लगाया जा सकेगा।
मनपा के इस कदम से यह संदेश स्पष्ट है कि निर्माण कार्य के नाम पर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी नियमों की अनदेखी को अब सामान्य प्रक्रिया के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, मौके पर निगरानी की जरूरत
शहर में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों को देखते हुए अब सबसे बड़ा सवाल इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन का है। कई निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कागजों पर दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में मनपा के संबंधित विभागों द्वारा मैदानी निरीक्षण, फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग और नियमित निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, धूल नियंत्रण के उपाय केवल प्रदूषण कम करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक सड़कों की स्वच्छता से भी जुड़े हैं। इसलिए स्टॉप-वर्क और जुर्माने के प्रावधान तभी प्रभावी साबित होंगे, जब नियमों को सभी निर्माण स्थलों पर समान रूप से लागू किया जाए।
विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी जरूरी
शहर में आवासीय और व्यावसायिक निर्माण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। मनपा का नया सख्त रुख यदि नियमित निरीक्षण और पारदर्शी कार्रवाई के साथ लागू होता है, तो निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल और उससे होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नियम तोड़ने वाले बड़े और छोटे सभी विकासकों के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई होती है या नहीं।

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