वसई-विरार में बैनर वार...! बविआ प्रमुख हितेंद्र ठाकुर ‘अप्पा’ या प्रथम महापौर राजीव पाटिल ‘नाना’—किसके जन्मदिन के बैनर अधिक आकर्षक? बढ़ती होर्डिंग्स ने खींचा लोगों का ध्यान...
वसई-विरार में बैनर वार...!
बविआ प्रमुख हितेंद्र ठाकुर ‘अप्पा’ या प्रथम महापौर राजीव पाटिल ‘नाना’—किसके जन्मदिन के बैनर अधिक आकर्षक? बढ़ती होर्डिंग्स ने खींचा लोगों का ध्यान
डिजाइन से लेकर आकार तक दिख रहा उत्साह
दोनों नेताओं के समर्थकों की ओर से लगाए गए बैनरों में बड़े-बड़े फोटो, रंगीन ग्राफिक्स, आकर्षक स्लोगन और जन्मदिन की शुभकामनाएं प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर एक ही सड़क या चौराहे के आसपास अलग-अलग समूहों द्वारा लगाए गए बैनर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की झलक भी देते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इन बैनरों के फोटो और वीडियो साझा किए जाने लगे हैं। कुछ नागरिक जहां इसे अपने पसंदीदा नेता के प्रति समर्थकों का उत्साह बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे ‘कौन बड़ा, किसका प्रभाव अधिक’ दिखाने वाली होड़ के रूप में देख रहे हैं।
शहर की सियासत में ‘बैनर पॉलिटिक्स’ नई नहीं
वसई-विरार की स्थानीय राजनीति में नेताओं के जन्मदिन, वर्षगांठ और विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रमों के अवसर पर बड़े पैमाने पर बैनर लगाने की परंपरा लंबे समय से देखने को मिलती रही है। जन्मदिन के अवसर पर समर्थकों द्वारा शक्ति प्रदर्शन करना भी स्थानीय राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। इस बार हालांकि बैनरों की संख्या और उनकी दृश्यता के कारण यह मामला विशेष चर्चा में है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में राहगीरों और वाहन चालकों का ध्यान इन शुभकामना संदेशों की ओर जा रहा है।
आकर्षण के साथ नियमों पर भी सवाल
बैनरों की बढ़ती संख्या के बीच एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है—क्या सभी होर्डिंग्स और बैनर निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया के तहत लगाए गए हैं? शहर में सार्वजनिक स्थानों, सड़क किनारे, बिजली के खंभों अथवा अन्य स्थानों पर लगाए जाने वाले विज्ञापन एवं शुभकामना फलक को लेकर मनपा के नियम लागू होते हैं। ऐसे में नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक अथवा सामाजिक कार्यक्रमों के नाम पर लगाए जाने वाले बैनरों के मामले में भी नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए। हालांकि, संबंधित बैनरों को लेकर अनुमति, शुल्क अथवा नियमों के उल्लंघन की स्थिति के बारे में किसी विशिष्ट मामले में आधिकारिक जानकारी सामने आए बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
‘अप्पा’ बनाम ‘नाना’ की चर्चा
एक तरफ बविआ प्रमुख हितेंद्र ठाकुर ‘अप्पा’ के समर्थकों में जन्मदिन को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर प्रथम महापौर राजीव पाटिल ‘नाना’ के समर्थक भी पीछे नहीं दिखाई दे रहे। नतीजा यह कि शहर के कई हिस्सों में दोनों नेताओं के जन्मदिन के बैनर एक-दूसरे के आसपास नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर इसे मजाकिया अंदाज में ‘वसई-विरार का बैनर वार’ कहा जा रहा है। अब शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय यह नहीं रह गया है कि किसका जन्मदिन है, बल्कि सवाल यह बन गया है—“बैनर किसके ज्यादा हैं और डिजाइन किसका ज्यादा आकर्षक?”
बहरहाल, जन्मदिन की शुभकामनाओं के बहाने शुरू हुई यह अनौपचारिक ‘बैनर प्रतियोगिता’ फिलहाल वसई-विरार की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बनी हुई है।

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