नायगांव में सरकारी भूखंड पर कथित अवैध चालियों का निर्माण..??परेरा नगर में डॉन बॉस्को स्कूल के पास निर्माणकार्य को लेकर सवाल...
नायगांव में सरकारी भूखंड पर कथित अवैध चालियों का निर्माण..??
परेरा नगर में डॉन बॉस्को स्कूल के पास निर्माणकार्य को लेकर सवाल ; हेमंत वर्मा का नाम सामने आने से मामला गरमाया, संभावित खरीदारों के हितों की सुरक्षा की मांग
नायगांव ( लालप्रताप सिंह ) : वसई-विरार शहर महानगरपालिका की प्रभाग समिति ‘जी’ अंतर्गत नायगांव क्षेत्र के परेरा नगर में डॉन बॉस्को स्कूल के समीप सरकारी भूखंड पर कथित रूप से चालियों के निर्माणकार्य का मामला सामने आया है। आरोप है कि हेमंत वर्मा की ओर से उक्त स्थान पर निर्माणकार्य कराया जा रहा है। यदि संबंधित भूखंड वास्तव में सरकारी है और निर्माण के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की गई है, तो यह मामला न केवल मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भविष्य में आम नागरिकों के संभावित आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकता है। स्थानीय स्तर पर इस कथित निर्माण को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में संबंधित भूखंड की वास्तविक मालकी, निर्माण की वैधता और उपलब्ध अनुमतियों की प्रशासनिक स्तर पर तत्काल जांच किए जाने की आवश्यकता है। सरकारी जमीन पर निर्माण को लेकर गंभीर सवाल : सरकारी भूखंड पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण किए जाने से पहले संबंधित प्राधिकरण की अनुमति और जमीन के वैध उपयोग की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। ऐसे में परेरा नगर के मामले में सबसे पहला सवाल यही है कि संबंधित भूखंड सरकारी अभिलेखों में किस स्वरूप में दर्ज है और वहां निर्माण के लिए किस प्रकार की अनुमति दी गई है। यदि कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं है, तो निर्माणकार्य शुरू होने पर संबंधित विभाग द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ऐसा प्रश्न खड़ा हो रहा है।स्थानीय नागरिकों के बीच यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि निर्माण पूरा होने के बाद यदि वहां कमरे अथवा चाली के हिस्से आम नागरिकों को बेचे या किराये पर दिए जाते हैं, तो भविष्य में खरीदार अथवा रहिवासी मुश्किल में पड़ सकते हैं। भोयदापाड़ा, अग्रवाल और गौराईपाड़ा के मामलों की पृष्ठभूमि में चिंता : वसई-विरार शहर में जमीन और अवैध निर्माण से जुड़े विवादों का पुराना अनुभव देखते हुए परेरा नगर का मामला गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। भोयदापाड़ा, अग्रवाल तथा गौराईपाड़ा जैसे क्षेत्रों में आम नागरिकों के साथ कथित जमीन अथवा निर्माण संबंधी धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन घटनाओं से सबसे बड़ा सबक यही मिलता है कि सस्ते घर या कमरे के नाम पर निवेश करने से पहले जमीन और निर्माण की वैधता की जांच अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि निर्माण अवैध पाए जाने की स्थिति में कार्रवाई का सामना उस व्यक्ति को भी करना पड़ सकता है, जिसने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर वहां रहने का सपना देखा हो। ‘पहले निर्माण, बाद में कार्रवाई’ का सिलसिला कब रुकेगा? : शहर में कथित अवैध निर्माणों को लेकर एक बड़ा सवाल हमेशा सामने आता है—निर्माण शुरू होने के समय प्रशासन कहां होता है? किसी भी निर्माण को खड़ा होने में एक दिन नहीं लगता। नींव पड़ती है, दीवारें उठती हैं, छत तैयार होती है और उसके बाद रहने योग्य ढांचा तैयार होता है। ऐसे में यदि किसी सरकारी भूखंड पर कथित रूप से निर्माणकार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, तो संबंधित मनपा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता का सवाल सीधा है— क्या संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया है? क्या निर्माणकर्ता के पास आवश्यक अनुमति है? क्या भूखंड का सरकारी रिकॉर्ड जांचा गया है? और यदि निर्माण अवैध पाया जाता है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? संभावित खरीदारों को सावधान रहने की जरूरत : परेरा नगर में चल रहे कथित निर्माण के संबंध में जब तक प्रशासन द्वारा जमीन और निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री अथवा आर्थिक लेन-देन से पहले सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच करने की आवश्यकता है। विशेष रूप से जमीन का 7/12 उतारा, मालकी हक्क, निर्माण अनुमति, संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच किए बिना केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर निवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। मनपा प्रशासन से तत्काल जांच की मांग : परेरा नगर स्थित डॉन बॉस्को स्कूल के समीप कथित निर्माण की स्वतंत्र जांच कर संबंधित भूखंड का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग स्थानीय स्तर पर उठाई जानी चाहिए। यदि निर्माण वैध है, तो मनपा प्रशासन को संबंधित अनुमति और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि निर्माण अनधिकृत अथवा सरकारी भूखंड पर बिना अनुमति पाया जाता है, तो संबंधित कानूनों के तहत तत्काल कार्रवाई किए जाने के साथ-साथ यह भी जांचना आवश्यक होगा कि निर्माण शुरू होने के बाद संबंधित विभागों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। अब सवाल निर्माण से ज्यादा निगरानी का है : परेरा नगर का मामला सिर्फ एक कथित निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह जांच का विषय भी है कि सरकारी भूखंडों की सुरक्षा और उन पर होने वाले निर्माणों की निगरानी के लिए प्रशासन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। सरकारी जमीन पर एक ईंट भी यदि बिना अनुमति रखी गई है, तो सवाल सिर्फ उस ईंट का नहीं है—सवाल उस पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का है, जिसने उसे वहां तक पहुंचने दिया। अब देखना होगा कि मनपा प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर तथ्य सामने लाता है या फिर निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाती है।

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