वसई-विरार में भाजपा और बविआ की राजनीति पर संजय प्यारेलाल गुप्ता का हमला...

वसई-विरार में भाजपा और बविआ की राजनीति पर संजय प्यारेलाल गुप्ता का हमला...

“जनता को मूर्ख बनाकर दोनों पार्टियां खेल रही हैं आंदोलन-आंदोलन का खेल”

बिजली बिल पर भाजपा तो बढ़ी घरपट्टी-पानीपट्टी पर बविआ की चुप्पी पर उठाए सवाल

वसई-विरार : वसई-विरार शहर में बढ़ती महंगाई, भारी-भरकम बिजली बिल, बढ़ी हुई घरपट्टी-पानीपट्टी और बुनियादी सुविधाओं के संकट को लेकर अब राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी मुद्दे को लेकर संजय प्यारेलाल गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) दोनों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि दोनों पार्टियां जनता की वास्तविक समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के बजाय अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए केवल “आंदोलन-आंदोलन” का खेल खेल रही हैं।

गुप्ता का कहना है कि वसई-विरार की आम जनता आज दोहरी-तिहरी मार झेल रही है। एक तरफ मनपा की बढ़ी हुई घरपट्टी और पानीपट्टी का बोझ है, तो दूसरी ओर बिजली के बढ़ते बिलों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। इसके साथ ही सड़क, पानी, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर नागरिक लगातार परेशान हैं।

बिजली बिल के मुद्दे पर भाजपा से सवाल

संजय प्यारेलाल गुप्ता के मुताबिक, भाजपा द्वारा बिजली बिल, बिजली कटौती और महावितरण से जुड़े मुद्दों को लेकर समय-समय पर आंदोलन किए जाते रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल आंदोलन करने से आम नागरिक की समस्या खत्म हो जाएगी?

उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि बिजली बिलों का मुद्दा इतना गंभीर है, तो इसके स्थायी समाधान के लिए सरकार और संबंधित विभाग पर कितना प्रभावी दबाव बनाया गया? आम उपभोक्ता को बढ़ते बिजली बिल से राहत दिलाने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं दिखाई दे रही?

गुप्ता का आरोप है कि जनता के बीच जाकर आंदोलन करने के बजाय राजनीतिक दलों को सरकार और प्रशासन के सामने जवाबदेही तय कराने और ठोस निर्णय करवाने की दिशा में काम करना चाहिए।

घरपट्टी-पानीपट्टी पर बविआ को घेरा

दूसरी ओर, गुप्ता ने बविआ पर निशाना साधते हुए कहा कि बढ़ी हुई घरपट्टी और पानीपट्टी को लेकर नागरिकों में नाराजगी है, लेकिन इसी के साथ बढ़ते बिजली बिल जैसे गंभीर मुद्दे पर बविआ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

उनका कहना है कि एक पार्टी बिजली बिल को लेकर आंदोलन करती है, जबकि दूसरी पार्टी घरपट्टी को लेकर आवाज उठाती है। लेकिन आम जनता के लिए बिजली, पानी, घरपट्टी और अन्य नागरिक सुविधाएं अलग-अलग राजनीतिक मुद्दे नहीं हैं—ये उसके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं।

“जनता को मुद्दों में बांटकर राजनीति क्यों?”

गुप्ता ने कहा कि जनता को अलग-अलग मुद्दों में बांटकर राजनीतिक लाभ लेने के बजाय दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को एक साथ बैठकर नागरिक समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दोनों पार्टियां वास्तव में जनता के हित में काम करना चाहती हैं, तो बढ़ी हुई घरपट्टी, पानीपट्टी और बिजली बिल—तीनों मुद्दों को एक साथ लेकर निर्णायक लड़ाई क्यों नहीं लड़तीं?

उनके अनुसार, जनता को केवल भाषण, मोर्चे, नारे और आंदोलन नहीं चाहिए, बल्कि राहत और स्थायी समाधान चाहिए।

“आंदोलन के बाद नतीजा क्या?”

वसई-विरार में पिछले कुछ समय से विभिन्न नागरिक समस्याओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार देखने को मिल रही हैं। लेकिन जनता के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि आंदोलन के बाद वास्तविक बदलाव कितना आया?

गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन जनता की आवाज उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन यदि आंदोलन केवल फोटो, प्रेस विज्ञप्ति और राजनीतिक प्रचार तक सीमित रह जाए तो उसका उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।

उन्होंने दोनों दलों से सवाल करते हुए कहा कि आंदोलन के बाद जनता को परिणाम कब मिलेगा? बिजली बिल कम होंगे या नहीं? बढ़ी हुई घरपट्टी और पानीपट्टी पर राहत मिलेगी या नहीं? नागरिकों को बेहतर सड़क, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिलेंगी?

“जनता को राम भरोसे छोड़ अपनी राजनीति चमका रहे नेता”

संजय प्यारेलाल गुप्ता ने आरोप लगाया कि आम नागरिक महंगाई और बढ़ते खर्च के बीच पिस रहा है, जबकि राजनीतिक दल अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार मुद्दे चुनकर राजनीति कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “जनता को राम भरोसे छोड़कर दोनों पार्टियां अपनी राजनीतिक चमकाने में लगी हैं। आम नागरिकों को हो रही तकलीफों से किसी का कोई सरोकार दिखाई नहीं देता।”

उन्होंने कहा कि जनता अब केवल यह देखना चाहती है कि कौन-सा नेता वास्तव में उसके लिए खड़ा है और कौन केवल राजनीतिक मंच पर दिखाई देता है।

जनता को आंदोलन नहीं, समाधान चाहिए..

वसई-विरार की जनता के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसकी मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा। बिजली बिल हो, घरपट्टी-पानीपट्टी हो या बुनियादी सुविधाओं का संकट—नागरिकों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा ठोस राहत और जवाबदेही की जरूरत है।

गुप्ता ने भाजपा और बविआ दोनों से अपील की है कि वे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर जनता के सभी प्रमुख मुद्दों को एक साथ लेकर प्रशासन और सरकार पर निर्णायक दबाव बनाएं। क्योंकि जनता को अब यह तय करना है कि उसे केवल आंदोलन चाहिए या आंदोलन के बाद मिलने वाला वास्तविक परिणाम और समाधान।

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