धुमाल नगर में 10 हजार वर्गफीट कथित अवैध निर्माण! चिंतामणि इंडस्ट्रियल में पोटमाला, साइड व टेरेस कवरिंग का आरोप; मनपा की चुप्पी पर उठे सवाल...

धुमाल नगर में 10 हजार वर्गफीट कथित अवैध निर्माण!

चिंतामणि इंडस्ट्रियल में पोटमाला, साइड व टेरेस कवरिंग का आरोप; मनपा की चुप्पी पर उठे सवाल

वसई ( लालप्रताप सिंह) : वसई-विरार शहर मनपा प्रभाग समिति ‘जी’ कार्यक्षेत्र धुमाल नगर स्थित चिंतामणि इंडस्ट्रियल परिसर में नियम-कायदों की कथित अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां ग्राउंड फ्लोर पर पोटमाला निर्माण के साथ-साथ साइड कवरिंग तथा टेरेस कवरिंग का काम किया गया है। स्थानीय स्तर पर इस पूरे कथित निर्माण का क्षेत्रफल करीब 10 हजार वर्गफीट बताया जा रहा है। मामले ने महानगरपालिका के संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि उक्त निर्माण बिना आवश्यक अनुमति अथवा मंजूर विकास आराखड़े के विपरीत किया गया है, तो सवाल यह है कि निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर उसके बड़े पैमाने पर विस्तार तक संबंधित मनपा अधिकारियों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी?

अनुमति के बिना निर्माण हुआ तो जिम्मेदार कौन?

बताया जा रहा है कि चिंतामणि इंडस्ट्रियल परिसर में ग्राउंड फ्लोर पर पोटमाला बनाने के साथ साइड तथा टेरेस कवरिंग के माध्यम से अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। करीब 10 हजार वर्गफीट के कथित निर्माण को लेकर अब यह जांच का विषय है कि इसके लिए महानगरपालिका से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी अथवा नहीं। यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण कर पंचनामा, नोटिस तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा है।

कार्रवाई के बजाय ‘कुंभकर्णी नींद’?

स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर महानगरपालिका समय-समय पर सख्त रुख अपनाने का दावा करती है। लेकिन दूसरी ओर, यदि किसी औद्योगिक परिसर में हजारों वर्गफीट का कथित अनधिकृत निर्माण खड़ा हो जाए और संबंधित विभाग को इसकी भनक तक न लगे, तो यह प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान है। स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है? यदि किया है तो कथित निर्माण के संबंध में क्या कार्रवाई की गई? और यदि निरीक्षण नहीं किया गया, तो इतने बड़े निर्माण कार्य से अधिकारी अनजान कैसे रहे?

‘भ्रष्टाचार की मलाई’ के आरोप की जांच जरूरी

इस मामले में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा मनपा के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए महानगरपालिका प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कराया जाना आवश्यक है। सवाल सिर्फ एक निर्माण का नहीं, बल्कि मनपा की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही का है। यदि निर्माण अवैध है तो उसे संरक्षण किसका मिला? निर्माण कार्य को रोकने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी? और कार्रवाई में देरी क्यों हुई - इन तमाम सवालों का जवाब अब प्रशासन को देना होगा।

अब देखना है कार्रवाई कब?

चिंतामणि इंडस्ट्रियल में बताए जा रहे करीब 10 हजार वर्गफीट के कथित अनधिकृत निर्माण पर अब सभी की नजर महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर निर्माण की वैधता की जांच करेंगे? क्या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित निर्माणकर्ता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी? अथवा मामला भी शहर में सामने आने वाले अन्य कथित अवैध निर्माणों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

अब देखना यह है कि प्रभाग समिति ‘जी’ के जिम्मेदार अधिकारी कब अपनी ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागते हैं और कथित अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।

यदि निर्माण वास्तव में अनधिकृत पाया जाता है, तो नियमानुसार उसे निष्कासित/हटाने तथा जिम्मेदार निर्माणकर्ता के विरुद्ध लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग जोर पकड़ सकती है।


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