BMC में 500 वर्ग फुट तक के घरों को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट, तो VVCMC में बढ़ोतरी क्यों? – मनोज बारोट
BMC में 500 वर्ग फुट तक के घरों को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट, तो VVCMC में बढ़ोतरी क्यों? – मनोज बारोट
नालासोपारा : बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा 500 वर्ग फुट (46.45 वर्ग मीटर) तक के कार्पेट एरिया वाले आवासीय घरों को संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) से छूट दिए जाने के बाद अब वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) की कर नीति पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा नेता मनोज बारोट ने आरोप लगाया है कि जहां मुंबई में आम नागरिकों को राहत दी जा रही है, वहीं वसई-विरार के नागरिकों पर संपत्ति कर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। मनोज बारोट ने कहा कि वसई-विरार शहर में बड़ी संख्या में मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवार निवास करते हैं। ऐसे परिवार पहले से ही महंगाई, बिजली-पानी के बढ़ते बिल और अन्य आवश्यक खर्चों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद महानगरपालिका द्वारा संपत्ति कर में बढ़ोतरी करना आम नागरिकों के हितों के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब BMC जैसी देश की सबसे बड़ी और आर्थिक रूप से सक्षम महानगरपालिका 500 वर्ग फुट तक के घरों को कर में राहत दे सकती है, तो VVCMC ऐसा कदम क्यों नहीं उठा सकती? उनका कहना है कि नागरिकों को राहत देने के बजाय करों में वृद्धि करना जनभावनाओं के विपरीत निर्णय है। बारोट ने आरोप लगाया कि वसई-विरार के नागरिक नियमित रूप से संपत्ति कर का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके अनुरूप मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। शहर के कई हिस्सों में टूटी सड़कें, जलभराव, खुले नाले, खराब सफाई व्यवस्था और अधूरी नागरिक सुविधाएं लगातार लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में कर बढ़ाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की कि वसई-विरार में भी 500 वर्ग फुट तक के कार्पेट एरिया वाले आवासीय घरों को संपत्ति कर से छूट देने अथवा कर में पर्याप्त राहत देने पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही हाल ही में की गई कर वृद्धि के निर्णय की पुनः समीक्षा कर आम नागरिकों को राहत प्रदान की जाए। भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि यदि नागरिकों के हितों की अनदेखी जारी रही और कर वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो भाजपा जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने पर विचार करेगी।

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