विरार पूर्व के कुंभार पाड़ा में अवैध निर्माण पर उठे सवाल, दबंगई, भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप ; सह आयुक्ता अश्विनी मोरे की ईमानदारी पर भी उठ रहा है सवाल..
विरार पूर्व के कुंभार पाड़ा में अवैध निर्माण पर उठे सवाल, दबंगई, भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप ; सह आयुक्ता अश्विनी मोरे की ईमानदारी पर भी उठ रहा है सवाल..
विरार : विरार पूर्व के कुंभार पाड़ा क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार पुनः वसई विरार शहर मनपा प्रभाग समिति सी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि दबंगई, भ्रष्टाचार और राजनीतिक रसूख के बल पर पिछले 3 दिन में अवैध निर्माण खड़ा कर दिया गया, जबकि संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा। आरोप है कि निर्माण कार्य की जानकारी मनपा के संबंधित अधिकारियों तक पहले से पहुंचाई गई थी, इसके बावजूद समय पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई की जाती, तो निर्माण को आगे बढ़ने से रोका जा सकता था। अब निर्माण पूरा होने पर अवैध निर्माणकर्ता का मनोबल दुगुना हो गया है। वह लोगों को मनपा अधिकारियों पर अपने वर्चस्व की डींग हांक रहा है। इससे मनपा प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के कारण नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। उनका कहना है कि आम नागरिकों के छोटे-छोटे मामलों में तत्काल कार्रवाई करनेवाली सह आयुक्ता अश्विनी मोरे प्रशासन अब उक्त अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। जबकि उक्त अवैध निर्माण की ऑनलाइन शिकायत भी की गई है. बावजूद सह आयुक्ता अश्विनी मोरे कार्रवाई का साहस नहीं जुटा पा रही हैं। जिससे सह आयुक्ता अश्विनी मोरे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि सह आयुक्ता या तो सबंधित अवैध निर्माणकर्ता से डर गई हैं या फिर नजराना लेकर आंख मूंद ली हैं..?? जिसके चलते शिकायतों के बावजूद भी उक्त अवैध निर्माण के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध निर्माण की वैधता की जांच की जाए तथा यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। अथवा नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध निर्माण और कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे नियमों का पालन करने वाले लोगों का प्रशासन पर से विश्वास कमजोर होगा। उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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