प्रशासनिक कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार की जांच से पहले पुराने प्रस्तावों को मंजूरी देने का प्रयास, विरोधी सदस्यों का स्थायी समिति की बैठक से वॉकआउट
प्रशासनिक कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार की जांच से पहले पुराने प्रस्तावों को मंजूरी देने का प्रयास, विरोधी सदस्यों का स्थायी समिति की बैठक से वॉकआउट...
विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान लिए गए पुराने एवं विवादित प्रस्तावों को कथित रूप से जांच किए बिना कार्योत्तर मंजूरी देने के प्रयास का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल के स्थायी समिति सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट किया। स्थायी समिति सदस्य प्रज्ञा कमलाकर पाटील ने पत्रकार परिषद में बताया कि शुक्रवार को आयोजित स्थायी समिति की बैठक के एजेंडे में कुल 41 विषय शामिल थे। इनमें से लगभग 25 से 30 विषय ऐसे हैं, जो प्रशासनिक राज के दौरान स्वीकृत किए गए थे अथवा जिन पर उस समय निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल 2026 को आयोजित महासभा में विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का विशेष ऑडिट कराने तथा पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कर श्वेत पत्र (White Paper) जारी करने का प्रस्ताव क्रमांक 17 प्रस्तुत किया था, जिसे महासभा ने मंजूरी भी दी थी। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासनिक कार्यकाल में विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में पहले उन कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, लेकिन जांच संबंधी प्रस्ताव पारित होने के बावजूद अब उन्हीं पुराने प्रस्तावों और निविदाओं को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्योत्तर स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रज्ञा पाटील ने दावा किया कि कई विकास कार्य वास्तविक रूप से पहले ही पूरे हो चुके हैं और अब उन्हें कागजी मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसे प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाती है तो भविष्य में होने वाली जांच में ऐसा प्रतीत हो सकता है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी इन कथित अनियमितताओं का समर्थन किया था। विपक्षी सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वसई-विरार के नागरिकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले जनहित के कार्यों का वे हमेशा समर्थन करेंगे, लेकिन प्रशासनिक कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने वाले किसी भी प्रस्ताव को उनकी सहमति नहीं मिलेगी। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सत्तापक्ष और प्रशासन उनकी आपत्तियों को सुनने के बजाय पारदर्शी प्रशासन की भावना की अनदेखी कर रहे हैं। इसी के विरोध में प्रशासनिक कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार को समर्थन देने से इनकार करते हुए विपक्ष के सभी छह स्थायी समिति सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया।

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