महाराष्ट्र में स्टार्टअप्स के साथ भेदभाव..?? स्टार्ट अप की 1 वर्ष की शर्त पर उठे सवाल

महाराष्ट्र में स्टार्टअप्स के साथ भेदभाव..?? स्टार्ट अप की 1 वर्ष की शर्त पर उठे सवाल

मुंबई : एक ओर केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार स्टार्टअप इंडिया,एमएसएमई और मुद्रा योजना के माध्यम से नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार के महाराष्ट्र डीजीआईपीआर विभाग की इम्पैनलमेंट प्रक्रिया में स्टार्टअप्स के लिए कम से कम एक वर्ष पुराना होने की अनिवार्य शर्त विवाद का विषय बन गई है। सरकारी अधिकारियों द्वारा की जा रही मनमानी को लेकर महाराष्ट्र में स्टार्ट अप उद्यमियों में दिखी नाराजगी जानकारी के अनुसार, प्री-बिड बैठक के दौरान विभाग की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि एक वर्ष की अनिवार्यता वाली शर्त को हटाया जाएगा। इसके बावजूद अब तक इस शर्त में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसके कारण नए और योग्य स्टार्टअप्स इम्पैनलमेंट प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि यह शर्त स्टार्टअप इंडिया और एमएसएमई को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के उद्देश्य के विपरीत है। उनका मानना है कि यदि नए स्टार्टअप्स को शुरुआत में ही सरकारी अवसरों से वंचित रखा जाएगा, तो नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उद्यमियों ने महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा इम्पैनलमेंट की एक वर्ष की अनिवार्य शर्त को समाप्त कर सभी पात्र स्टार्टअप्स को समान अवसर प्रदान करने की मांग की है।

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