नायगांव पूर्व में पेंटिंग के दौरान ऊंचाई से गिरकर मजदूर की मौत
नायगांव पूर्व में पेंटिंग के दौरान ऊंचाई से गिरकर मजदूर की मौत
‘रश्मी स्टार सिटी’ में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता
नायगांव : नायगांव पूर्व स्थित रश्मी स्टार सिटी परिसर में गुरुवार को पेंटिंग का काम करते समय ऊंचाई से गिरने के कारण 43 वर्षीय मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान सादिकुल सोहाब शेख के रूप में हुई है। हादसे के बाद एक बार फिर वसई-विरार शहर में निर्माण एवं पेंटिंग कार्यों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सादिकुल शेख नायगांव पूर्व स्थित सी-7, रश्मी स्टार सिटी इमारत में पेंटिंग का काम कर रहे थे। बताया गया है कि उन्होंने सुरक्षा बेल्ट पहन रखी थी। काम के दौरान अचानक वे इमारत से नीचे गिर गए। ऊंचाई से गिरने के कारण उनके माथे और सिर में गंभीर चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद उन्हें उपचार के लिए जुचंद्र स्थित अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद नायगांव पुलिस ने मामले को आकस्मिक मृत्यु के रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहले भी हो चुका है हादसा
शहर में ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले वैतरणा रोड स्थित एक कंपनी में काम करने के दौरान 33 वर्षीय सुभाष चंद्र विश्वकर्मा की करीब 25 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई थी। आरोप था कि उन्हें खतरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया तथा पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेजी से बढ़ रहा निर्माण, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत?
वसई-विरार शहर के नायगांव, वसई, नालासोपारा और विरार सहित विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। बहुमंजिला इमारतों के निर्माण, पेंटिंग, बाहरी प्लास्टर और अन्य ऊंचाई वाले कार्यों में बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत हैं। निर्माण कार्यों की गति बढ़ने के बावजूद कई स्थानों पर श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया जा रहा है, यह सवाल अब महत्वपूर्ण बन गया है। ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट, सेफ्टी नेट, मजबूत मचान तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपायों की उपलब्धता और उनके सही इस्तेमाल की नियमित जांच होना जरूरी है।
हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
श्रमिकों की सुरक्षा केवल संबंधित ठेकेदार या निर्माण कंपनी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संबंधित परियोजना स्थल पर सुरक्षा मानकों की निगरानी करने वाली व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि क्या निर्माण एवं पेंटिंग कार्य शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों की पर्याप्त जांच की जाती है? क्या नियमित निरीक्षण होता है? और यदि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित ठेकेदार या परियोजना प्रबंधन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होती है?
नायगांव की इस घटना ने इन तमाम सवालों को फिर से सामने ला दिया है।
मृतक के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रोजगार की तलाश में जोखिम भरे काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा ही सबसे बड़ा सहारा होती है। एक हादसा न केवल एक श्रमिक की जान लेता है, बल्कि उसके परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट भी खड़ा कर देता है। सादिकुल शेख की मौत के बाद उनके परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस घटना की निष्पक्ष जांच करते हुए यह स्पष्ट करे कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या कार्यस्थल पर सभी निर्धारित सुरक्षा उपाय मौजूद थे।
लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए वसई-विरार शहर के सभी निर्माण एवं औद्योगिक परियोजना स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच और नियमित निरीक्षण की मांग जोर पकड़ रही है। विकास जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत मजदूरों की जान देकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।

Comments
Post a Comment