मनपा में जवाबदेही का अलार्म! सिटी इंजीनियर प्रदीप पचांगे के खिलाफ आमरण उपोषण से प्रशासन में खलबली...

मनपा में जवाबदेही का अलार्म! सिटी इंजीनियर प्रदीप पचांगे के खिलाफ आमरण उपोषण से प्रशासन में खलबली...

निलंबन की मांग पर आंदोलनकारी आर-पार के मूड में; मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, अब कार्रवाई या फिर सिर्फ आश्वासन..??

विरार : वसई-विरार शहर में मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। मनपा के सिटी इंजीनियर प्रदीप पचांगे के निलंबन की मांग को लेकर आमरण उपोषण शुरू किए जाने से प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब केवल आश्वासन से बात बनने वाली नहीं है और जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। शहर में लगातार सामने आ रहे सड़क, नाला, ड्रेनेज, निर्माण कार्य और अन्य विकास कार्यों से जुड़े सवालों के बीच सिटी इंजीनियर जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पद पर बैठे अधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठना मनपा प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शहर के विकास कार्यों में गुणवत्ता, नियोजन और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

‘अब जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं!’

आंदोलनकारियों का कहना है कि नागरिकों के टैक्स से मनपा का कामकाज चलता है और जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि विकास कार्यों अथवा तकनीकी मामलों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने निलंबन की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए आमरण उपोषण शुरू किया है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक आंदोलन पीछे नहीं हटेगा।

सिटी इंजीनियर की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?

सिटी इंजीनियर का पद मनपा की तकनीकी व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क निर्माण, नाले, ड्रेनेज व्यवस्था, विभिन्न विकास कार्यों की तकनीकी निगरानी तथा निर्माण से जुड़े मामलों में इंजीनियरिंग विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि इन कार्यों को लेकर नागरिकों या सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार सवाल उठते हैं, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है। आंदोलनकारियों ने इसी आधार पर प्रदीप पचांगे के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन की मांग उठाई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

‘किसके संरक्षण में चल रही है व्यवस्था?’

आंदोलन के बीच सबसे बड़ा सवाल अब मनपा प्रशासन की जवाबदेही को लेकर खड़ा हो गया है। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो कार्रवाई में देरी क्यों? यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन खुली जांच कराकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?

यही सवाल अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन को अधिकारियों को बचाने की बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि शिकायतों और सवालों को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति से नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।

आमरण उपोषण से बढ़ा दबाव

निलंबन की मांग को लेकर आमरण उपोषण शुरू होने के बाद मनपा प्रशासन पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ आंदोलन को संभालना और दूसरी तरफ उठाए गए आरोपों की निष्पक्षता से जांच कराना। यदि प्रशासन ने समय रहते स्पष्ट और पारदर्शी निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन और व्यापक होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

अब निगाहें मनपा प्रशासन के फैसले पर

क्या सिटी इंजीनियर प्रदीप पचांगे के खिलाफ लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होगी? क्या जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटाया जाएगा? क्या आरोप सही पाए जाने पर निलंबन जैसी कार्रवाई होगी? या फिर एक बार फिर आश्वासन देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया जाएगा?

इन सवालों का जवाब अब मनपा प्रशासन को देना होगा।

फिलहाल प्रदीप पचांगे के निलंबन की मांग को लेकर शुरू हुआ आमरण उपोषण केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं, बल्कि मनपा में जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर उठती बड़ी आवाज बनता दिखाई दे रहा है।

अब सवाल सीधा है—कार्रवाई होगी या फिर फाइलों में दब जाएगा जनता का सवाल?

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