विरार में समाजसेवी विवेक तिवारी का सड़क सत्याग्रह जारी, रात में हटाने की कोशिश नाकाम

विरार में समाजसेवी विवेक तिवारी का सड़क सत्याग्रह जारी, रात में हटाने की कोशिश नाकाम


विरार : वसई विरार शहर की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर समाजसेवी विवेक तिवारी पिछले सात दिनों से 'सड़क सत्याग्रह' कर रहे हैं। लगातार सात दिनों से जारी इस आंदोलन के बीच शुक्रवार देर रात उन्हें मौके से हटाकर ले जाने की कथित कोशिश की गई, जिसे आंदोलनकारियों और समर्थकों की मौजूदगी के कारण नाकाम कर दिया गया। घटना के बाद सत्याग्रह स्थल पर तनाव का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। जानकारी के अनुसार, विवेक तिवारी पिछले सात दिनों से ‘सड़क सत्याग्रह’ के माध्यम से प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का ध्यान नागरिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से होना चाहिए। इसी मांग को लेकर वे भूखे प्यासे धरने पर बैठकर अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

देर रात हुई हलचल से बढ़ा तनाव

बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात कुछ लोग विवेक तिवारी को सत्याग्रह स्थल से हटाकर ले जाने के प्रयास में पहुंचे। जैसे ही इसकी जानकारी उनके समर्थकों और वहां मौजूद लोगों को हुई, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध बढ़ने के बाद विवेक तिवारी को मौके से ले जाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। घटना की जानकारी फैलते ही सत्याग्रह स्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। समर्थकों ने सवाल उठाया कि यदि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है तो रात के समय आंदोलनकारी को हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। हालांकि, देर रात हुई इस पूरी घटना को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

सात दिनों से जारी है आंदोलन

विवेक तिवारी का कहना है कि सड़क सत्याग्रह का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन के सामने मजबूती से रखना है। सात दिनों से लगातार सड़क पर बैठकर सत्याग्रह किए जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने से आंदोलन को लेकर लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है।आंदोलनकारियों का आरोप है कि जनता की समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी कारण सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

रात में विवेक तिवारी को हटाने की कथित कोशिश के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आंदोलन समर्थकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे व्यक्ति के साथ संवाद किया जाना चाहिए। यदि कोई प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक थी तो उसके संबंध में स्पष्ट जानकारी भी दी जानी चाहिए। फिलहाल विवेक तिवारी का सड़क सत्याग्रह जारी है। रात की घटना के बाद आंदोलन स्थल पर समर्थकों की सक्रियता बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या भूमिका निभाता है और सात दिनों से चल रहे सत्याग्रह को समाप्त कराने के लिए क्या ठोस पहल की जाती है।

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