एक ही इंडेक्स नंबर पर दो स्कूल.?? बच्चों की सुरक्षा और मान्यता पर गंभीर सवाल
एक ही इंडेक्स नंबर पर दो स्कूल.?? बच्चों की सुरक्षा और मान्यता पर गंभीर सवाल
विरार पूर्व स्थित साईनाथ परिसर का मामला ; निर्माणाधीन इमारत, शराब की दुकान और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
विरार : विरार पूर्व स्थित साईनाथ परिसर में संचालित स्वामी विवेकानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल तथा फादर एज्ञ्नेल स्कूल की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सामने आए वीडियो और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों के आधार पर स्कूल की इमारत, विभागीय मान्यता, इंडेक्स नंबर तथा आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। जानकारी के अनुसार, जिस इमारत में विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है, उसके निर्माणाधीन होने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इमारत की चौथी मंजिल पर भी विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। यदि भवन वास्तव में निर्माणाधीन है, तो उसमें विद्यार्थियों को बैठाने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य अनिवार्य अनुमतियां प्राप्त की गई हैं या नहीं, इसकी जांच बेहद जरूरी है।
एक ही इंडेक्स नंबर ने खड़े किए बड़े सवाल
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दोनों स्कूलों की शाखाओं से संबंधित बताया जा रहा है। वीडियो में प्रदर्शित स्कूल बोर्डों के अनुसार, ब्रांच-1 और ब्रांच-2 के लिए एक ही इंडेक्स नंबर 18-08-222 दर्शाया गया है। यदि दोनों वास्तव में अलग-अलग शाखाएं अथवा अलग-अलग संस्थान हैं, तो एक ही इंडेक्स नंबर के इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या दोनों शाखाओं को शिक्षा विभाग की विधिवत मान्यता प्राप्त है? उनके नाम, पते, क्षमता और संचालन की जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में किस प्रकार दर्ज है? इन तमाम सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित शिक्षा अधिकारियों से अपेक्षित है।
हालांकि, केवल बोर्ड पर एक समान इंडेक्स नंबर दिखाई देना अपने आप में नियम उल्लंघन साबित नहीं करता। वास्तविक स्थिति का पता शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और मान्यता दस्तावेजों की जांच के बाद ही चल सकेगा।
स्कूल के नीचे शराब की दुकान पर भी सवाल
स्थानीय लोगों द्वारा स्कूल की इमारत के नीचे अथवा आसपास ‘नेहा बीयर शॉप’ संचालित होने का दावा किया जा रहा है। स्कूल और शराब बिक्री केंद्र की निकटता को लेकर भी अभिभावकों में चिंता है। ऐसे में आबकारी विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए कि शराब दुकान को लाइसेंस किस आधार पर जारी किया गया और स्कूल से उसकी वास्तविक दूरी कितनी है।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि शराब दुकानों की दूरी से संबंधित नियम लाइसेंस के प्रकार और लागू कानून/सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल 50 मीटर के दावे के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय अधिकृत स्थल-माप और संबंधित नियमों के आधार पर जांच आवश्यक है।
तालाब के सामने स्कूल, सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता
स्कूल के ठीक सामने तालाब होने की बात भी सामने आई है। विद्यार्थियों की आवाजाही को देखते हुए स्कूल के प्रवेश और निकास मार्ग, गेट की सुरक्षा, चारदीवारी तथा बच्चों को तालाब की ओर जाने से रोकने के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल आपातकालीन स्थिति को लेकर है। यदि स्कूल परिसर में आग लगने, इमारत का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त होने अथवा किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न होती है, तो क्या दमकल वाहन और एंबुलेंस समय रहते स्कूल परिसर तक पहुंच सकते हैं? क्या इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन सीढ़ियां और निकासी मार्ग मानकों के अनुरूप हैं? इन सवालों का जवाब मौके पर निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
बच्चों को रोजाना स्कूल भेजने वाले अभिभावकों के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील है। अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल की मान्यता, भवन की स्थिति, विद्यार्थियों की अधिकतम क्षमता, अग्निशमन सुरक्षा, स्वच्छता, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और स्कूल परिसर के आसपास की परिस्थितियों की आधिकारिक जांच हो।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि किसी भी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि प्रशासन पहले ही सभी सुरक्षा मानकों की जांच कर ले। बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
शिक्षा विभाग और मनपा से तत्काल जांच की मांग
मामले में शिक्षा विभाग, वसई-विरार महानगरपालिका, अग्निशमन विभाग तथा संबंधित अन्य विभागों से संयुक्त निरीक्षण की मांग की जा रही है। जांच के दौरान स्कूल की मान्यता और इंडेक्स नंबर, भवन की वैधता, निर्माण अनुमति, अग्निशमन प्रमाणपत्र, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, स्कूल परिसर की सुरक्षा तथा आसपास संचालित दुकानों की वैधता जैसे सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि आरोप तथ्यहीन हैं तो प्रशासन को आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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