AI वीडियो के जरिए 66 वर्षीय महिला से 12 लाख की साइबर ठगी....
AI वीडियो के जरिए 66 वर्षीय महिला से 12 लाख की साइबर ठगी....
वित्तीय सहायता का लालच देकर साइबर जालसाजों ने बनाया शिकार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का कथित कृत्रिम वीडियो दिखाकर किया विश्वास कायम...
वसई : वसई की रहने वाली 66 वर्षीय एक महिला साइबर ठगों के नए और खतरनाक तरीके का शिकार हो गईं। जालसाजों ने वित्तीय सहायता दिलाने का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया और कथित तौर पर करीब 12 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। ठगी के लिए आरोपियों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का कृत्रिम वीडियो तैयार कर महिला के सामने पेश किया, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि उन्हें वास्तव में सरकारी अथवा किसी अधिकृत माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने वाली है। मिली जानकारी के अनुसार, साइबर जालसाजों ने पहले महिला से संपर्क किया और उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान आरोपियों ने अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का कथित रूप से तैयार किया गया AI वीडियो दिखाया। वीडियो और जालसाजों की बातों पर विश्वास करने के बाद महिला उनके बताए निर्देशों का पालन करती चली गईं। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग प्रक्रियाओं, दस्तावेजों अथवा सहायता राशि जारी करने के नाम पर महिला से रकम जमा कराने को कहा। महिला ने आरोपियों के झांसे में आकर कुल करीब 12 लाख रुपये उनके बताए माध्यम से भेज दिए। रकम पहुंचने के बाद जब कथित सहायता राशि नहीं मिली और आरोपियों से संपर्क नहीं हो सका, तब महिला को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।
AI तकनीक बना साइबर ठगों का नया हथियार
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को सामने ला दिया है। पहले जहां ठग फोन कॉल, फर्जी लिंक और ओटीपी के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर किसी चर्चित व्यक्ति के चेहरे और आवाज से मिलता-जुलता वीडियो तैयार करके लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की जा रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, किसी नेता, अधिकारी अथवा प्रसिद्ध व्यक्ति का वीडियो देखकर तुरंत उस पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। वीडियो वास्तविक दिखाई देने के बावजूद वह कृत्रिम रूप से तैयार किया गया हो सकता है।
वालिव पुलिस ने दर्ज किया मामला
मामले की शिकायत के आधार पर वालिव पुलिस स्टेशन में साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है और ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों तथा ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े माध्यमों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच भी की जा रही है।
नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
इस घटना के बाद नागरिकों से अपील की जा रही है कि सोशल मीडिया या मोबाइल पर किसी व्यक्ति अथवा नेता का वीडियो देखकर उसके आधार पर आर्थिक लेनदेन न करें। किसी भी सरकारी सहायता, पुरस्कार, सब्सिडी या वित्तीय योजना के नाम पर यदि कोई व्यक्ति पहले पैसे जमा करने के लिए कहता है तो उसकी सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
पुलिस की जांच के बाद ही इस मामले में ठगी की पूरी कार्यप्रणाली और आरोपियों की पहचान को लेकर अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।

Comments
Post a Comment