वसई विरार शहर मनपा में 64 करोड़ से अधिक के कथित घोटाले का आरोप, बायो-माइनिंग परियोजना पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल
वसई विरार शहर मनपा में 64 करोड़ से अधिक के कथित घोटाले का आरोप, बायो-माइनिंग परियोजना पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल
वसई-विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका में पुराने कचरे के बायो-माइनिंग और ठोस कचरा प्रबंधन परियोजनाओं को लेकर 64 करोड़ रुपये से अधिक के कथित आर्थिक घोटाले का आरोप सामने आया है। भाजपा के विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटील ने नालासोपारा पश्चिम स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को सामने रखते हुए ठेकेदार, तकनीकी सलाहकार संस्था और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। मनोज पाटील के अनुसार, पूरे मामले में फर्जी बिल, संदिग्ध मास बैलेंस, RDF की कथित फर्जी ढुलाई, प्राकृतिक पहाड़ी से पत्थर उत्खनन तथा वैज्ञानिक भू-भराव परियोजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। भाजपा ने सभी भुगतानों और दस्तावेजों का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा कथित तौर पर गलत तरीके से खर्च की गई राशि की वसूली की मांग की है।
39 करोड़ रुपये के कथित फर्जी बिल का आरोप
भाजपा के अनुसार, दिसंबर 2023 में मनपा के घन कचरा विभाग ने साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर प्राइवेट लिमिटेड, नालासोपारा पूर्व को करीब 13 लाख टन पुराने कचरे के प्रसंस्करण का ठेका 835 रुपये प्रति टन की दर से दिया था।आरोप है कि ठेकेदार और सलाहकार संस्था की मिलीभगत से कचरे का कथित रूप से गलत ‘मास बैलेंस’ तैयार किया गया। भाजपा का दावा है कि अप्रैल 2024 में कचरे का घनत्व 340 किलोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया था, जबकि जनवरी 2026 में यही घनत्व 840 किलोग्राम प्रति घनमीटर दिखाया गया। भाजपा ने सवाल उठाया कि प्राकृतिक रूप से बैठ चुके पुराने कचरे की मात्रा और घनत्व के आकलन में इतनी बड़ी विसंगति कैसे आई। पाटील के अनुसार, इसी आधार पर करीब 39 करोड़ रुपये के संदिग्ध बिलों का भुगतान किए जाने का आरोप है।
RDF की ढुलाई में छोटे वाहनों के इस्तेमाल का दावा
कचरे से तैयार होने वाले ईंधन यानी RDF (Refuse Derived Fuel) की ढुलाई को लेकर भी भाजपा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि कुछ दस्तावेजों में होंडा यूनिकॉर्न बाइक, मारुति स्विफ्ट डिजायर, टाटा इंडिका, पावर टिलर और टाटा ऐस जैसे छोटे वाहनों के माध्यम से 26 से 27 टन RDF की ढुलाई दर्शाई गई। भाजपा का आरोप है कि इन वाहनों के नाम पर बड़ी मात्रा में RDF परिवहन के प्रमाणपत्र तैयार किए गए और इन्हें डालमिया तथा अल्ट्राटेक जैसी सीमेंट कंपनियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। इतना ही नहीं, मनपा द्वारा सत्यापन के लिए भेजे गए पत्रों के जवाब कथित रूप से संदिग्ध ई-मेल आईडी और डोमेन से दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
17 हजार ब्रास पत्थर के कथित अवैध उत्खनन का आरोप
MRF परियोजना के नाम पर करीब 10 हजार वर्ग मीटर प्राकृतिक पहाड़ी की खुदाई कर लगभग 17 हजार ब्रास, यानी करीब 49 हजार घनमीटर पत्थर निकाले जाने का भी भाजपा ने आरोप लगाया है। पाटील के मुताबिक, निकाले गए पत्थर को 835 रुपये प्रति घनमीटर की दर से बेचकर करीब 4.09 करोड़ रुपये की कथित आर्थिक अनियमितता की गई। भाजपा का आरोप है कि इस गतिविधि के कारण महानगरपालिका पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) की ओर से करीब 12 करोड़ रुपये का दंड भी आया, जिसका आर्थिक भार अंततः जनता पर पड़ा।
24.64 करोड़ रुपये की SLF परियोजना पर भी सवाल
भाजपा ने वर्ष 2015-17 के दौरान सैटेलाइट सिटी परियोजना के तहत विकसित किए गए वैज्ञानिक भू-भराव केंद्र यानी SLF (Scientific Landfill Facility) को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पाटील के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के 90 प्रतिशत अनुदान वाली इस परियोजना का कार्य खिलारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। भाजपा का आरोप है कि करीब 24.64 करोड़ रुपये की परियोजना को उचित प्रक्रिया और अपेक्षित परिणामों के बिना पूर्ण दिखाया गया। उन्होंने दावा किया कि CAG की रिपोर्ट में भी परियोजना की राशि के बर्बाद होने का उल्लेख किया गया है, जबकि IIT पवई की 2017 की रिपोर्ट में कथित गंभीर तकनीकी खामियों की ओर संकेत किया गया था। भाजपा के अनुसार, इसके बावजूद संबंधित स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई और MPCB तथा NGT की कार्रवाई के कारण हर महीने करीब 20 लाख रुपये के दंड का सामना करना पड़ा।
ठेकेदार से लेकर अधिकारियों तक जांच की मांग
भाजपा ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए मांग की है कि ठेकेदार, तकनीकी सलाहकार, संबंधित मनपा अधिकारी तथा कथित फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं की भूमिका की स्वतंत्र जांच की जाए। विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटील ने कहा कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच शुरू की जानी चाहिए। साथ ही अब तक किए गए सभी भुगतानों की फोरेंसिक जांच कर जिम्मेदार लोगों से नुकसान की भरपाई कराने की मांग की गई है।
महासभा में पहले ही दिए जा चुके हैं जांच के निर्देश
बताया गया कि बायो-माइनिंग और कचरा प्रबंधन से जुड़े इस मुद्दे को लेकर महानगरपालिका की महासभा में पहले ही चर्चा हो चुकी है और महापौर की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे। अब भाजपा ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के साथ-साथ दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग को तेज कर दिया है।
भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच, एफआईआर और आर्थिक वसूली की कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी तीव्र आंदोलन करेगी।

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