वसई-विरार मनपा के 64 करोड़ के कचरा प्रक्रिया घोटाले में ठेकेदार पर FIR
वसई-विरार मनपा के 64 करोड़ के कचरा प्रक्रिया घोटाले में ठेकेदार पर FIR
विपक्ष नेता मनोज पाटील के लगातार प्रयासों को मिली सफलता; फर्जी RDF प्रमाणपत्रों से 37.66 करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप
विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका के घनकचरा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत भोयदापाड़ा, गोखिवरे स्थित क्षेपणभूमि पर पुराने जमा कचरे के बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट में कथित 64 करोड़ रुपये से अधिक के आर्थिक अनियमितता मामले में आखिरकार ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। मे. साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्रा. लि. के ठेकेदारों के खिलाफ बोळींज पुलिस थाने में 27 अगस्त 2026 को गुन्हा क्रमांक 474/2026 दर्ज किया गया है। भाजपा नेता एवं महानगरपालिका के विपक्ष नेता मनोज पाटील ने इस कथित घोटाले का मुद्दा महासभा में दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ उठाया था। संबंधितों के खिलाफ तत्काल आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर उन्होंने लगातार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। 26 अगस्त 2026 को आयोजित विशेष पत्रकार परिषद में भी उन्होंने इस मामले से जुड़े कथित अनियमितताओं के दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसके बाद मनपा आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. के निर्देश पर कार्रवाई आगे बढ़ी।
बोलिंज थाने में 27 अगस्त को मामला दर्ज
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 27 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 02 मिनट पर बोलिंज पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया गया। मनपा के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के सहायक आयुक्त जितेंद्र हरेश्वर नाईक ने सरकार की ओर से शिकायत दर्ज कराई। मामले में मे. साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदार हिंदकुमार श्रीकांत यादव (58), निवासी नालासोपारा पूर्व, तथा पुणे निवासी सब-कॉन्ट्रैक्टर अझरुद्दीन बशीर सय्यद को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 316(2), 316(5), 318(3), 336(3), 340(2), 212 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
दालमिया और अल्ट्राटेक के नाम पर कथित फर्जी प्रमाणपत्र
मनपा की शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर 2023 को साई यूटिलिटी को भोयदापाड़ा, गोखिवरे स्थित क्षेपणभूमि पर जमा लगभग 15 लाख घनमीटर पुराने कचरे तथा दैनिक कचरे पर वैज्ञानिक प्रक्रिया करने का ठेका दिया गया था। इस प्रक्रिया से तैयार होने वाले आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) को अधिकृत सीमेंट कंपनियों तक पहुंचाना और उसकी जानकारी मनपा को देना ठेकेदार की जिम्मेदारी थी।ठेकेदार द्वारा काम पूरा किए जाने के प्रमाण के तौर पर दालमिया सीमेंट, चंद्रपुर और आदित्य बिड़ला अल्ट्राटेक सीमेंट, राजस्थान को आरडीएफ की आपूर्ति किए जाने के प्रमाणपत्र मनपा में जमा किए गए थे। हालांकि, मई 2026 में इन प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठने के बाद मनपा ने संबंधित सीमेंट कंपनियों से ई-मेल के माध्यम से सत्यापन कराया। जांच में कथित तौर पर गंभीर विसंगतियां सामने आईं।आदित्य बिड़ला अल्ट्राटेक सीमेंट की ओर से मनपा को बताया गया कि कंपनी ने साई यूटिलिटी को केवल 500 मीट्रिक टन आरडीएफ की खरीद का आदेश दिया था। इसके बावजूद 50,000 मीट्रिक टन आरडीएफ की आपूर्ति दर्शाने वाले दस्तावेज पेश किए गए थे। वहीं, दालमिया सीमेंट ने भी साई यूटिलिटी को आरडीएफ संबंधी ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किया।
37.66 करोड़ रुपये के बिल मंजूर कराने का आरोप
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र और दस्तावेज तैयार कर मनपा को गुमराह किया तथा इसके आधार पर 37 करोड़ 66 लाख 73 हजार 510 रुपये के बिल मंजूर कराए गए। पुलिस अब इन दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया, आरडीएफ की वास्तविक आपूर्ति, संबंधित कंपनियों से हुए कथित पत्राचार तथा मनपा में प्रस्तुत प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच कर रही है।
दुचाकी से 26-27 टन RDF परिवहन दिखाने का दावा
मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, आरडीएफ के परिवहन को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। कथित तौर पर कुछ रिकॉर्ड में होंडा यूनिकॉर्न मोटरसाइकिल, मारुति सुजुकी डिजायर, टाटा इंडिका, पावर टिलर और टाटा एस जिप जैसे छोटे वाहनों से भारी मात्रा में आरडीएफ ले जाने का उल्लेख किया गया। कुछ वाहनों के माध्यम से एक बार में 26 से 27 टन तक आरडीएफ परिवहन किए जाने का दावा किया गया है। इस विसंगति ने पूरे परिवहन रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनपा की ओर से संबंधित प्रमाणपत्रों की पुनः जांच के लिए पत्राचार किए जाने पर कथित तौर पर फर्जी इलेक्ट्रॉनिक पते का इस्तेमाल कर दस्तावेजों को सही साबित करने का प्रयास किए जाने का भी आरोप है।
घनत्व रिपोर्ट में कथित हेराफेरी से 39 करोड़ की अनियमितता का आरोप
इस मामले में दिसंबर 2023 में 835 रुपये प्रति टन की दर से दिए गए काम के दौरान कचरे की घनता से संबंधित रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप के अनुसार, अप्रैल 2024 में कचरे की घनता 340 किलोग्राम प्रति घनमीटर थी, जबकि 16 जनवरी 2026 को इसे बढ़ाकर 840 किलोग्राम प्रति घनमीटर दर्शाया गया। इसी आधार पर कचरे के कम हुए आकारमान से संबंधित बिलों को प्रमाणित किए जाने और लगभग 39 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है।
17 हजार ब्रास पत्थर के कथित अवैध उत्खनन का भी आरोप
कचरा वर्गीकरण एवं प्रक्रिया परियोजना के दौरान प्राकृतिक पहाड़ी की खुदाई कर लगभग 17,000 ब्रास यानी करीब 49,000 घनमीटर पत्थर का कथित रूप से अवैध उत्खनन कर बिक्री किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इस मामले में मनपा से करीब 4.09 करोड़ रुपये की कथित दोहरी वसूली किए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन के चलते महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा लगाए गए लगभग 12 करोड़ रुपये के दंड का आर्थिक बोझ भी मनपा पर पड़ने का आरोप है।
पुराने वैज्ञानिक भू-भराव प्रकल्प की भी जांच की मांग
मामले की पृष्ठभूमि पुराने वैज्ञानिक भू-भराव प्रकल्प तक पहुंचती है। वर्ष 2015 से 2017 के दौरान खिलारी इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिए गए इस प्रकल्प में कथित तौर पर उचित प्रक्रिया किए बिना 24.62 करोड़ रुपये के भुगतान किए जाने का आरोप है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की आपत्तियों में भी लगभग 24.64 करोड़ रुपये की राशि के व्यर्थ जाने का उल्लेख किए जाने का दावा किया गया है। वहीं, IIT पवई की मई 2017 की रिपोर्ट में बताई गई कमियों पर प्रशासन द्वारा पर्याप्त कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप है। इन घटनाक्रमों के कारण महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण से संबंधित दंडात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा।
फॉरेंसिक ऑडिट और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग
विपक्ष नेता मनोज पाटील ने मांग की है कि पूरे प्रकरण में मनपा द्वारा किए गए सभी भुगतानों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। कथित फर्जी बिलों और गलत दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की गई राशि तत्काल वसूल की जाए। साथ ही, यदि जांच में मनपा के अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा सलाहकार संस्था की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज कर जिम्मेदारी तय की जाए, ऐसी मांग उन्होंने की है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र किसने तैयार किए, मनपा में उनकी जांच किस स्तर पर हुई, भुगतान किस प्रक्रिया के तहत मंजूर हुआ और इस पूरे मामले में ठेकेदार के अलावा अन्य किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका थी या नहीं। एफआईआर दर्ज होने के बाद इन सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एफआईआर में क्या आरोप लगाए गए हैं?
मनपा के सहायक आयुक्त जितेंद्र हरेश्वर नाईक की शिकायत के आधार पर बोळींज पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।
- साई यूटिलिटी को 15 दिसंबर 2023 को भोयदापाड़ा, गोखिवरे स्थित क्षेपणभूमि के पुराने कचरे की वैज्ञानिक प्रक्रिया का ठेका दिया गया था।
- परियोजना से तैयार आरडीएफ अधिकृत सीमेंट कंपनियों को देने की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी।
- दालमिया सीमेंट और आदित्य बिड़ला अल्ट्राटेक सीमेंट को आरडीएफ आपूर्ति किए जाने के कथित प्रमाणपत्र मनपा में प्रस्तुत किए गए।
- सत्यापन के दौरान अल्ट्राटेक द्वारा केवल 500 मीट्रिक टन की खरीद आदेश दिए जाने की जानकारी सामने आई, जबकि कथित दस्तावेजों में 50,000 मीट्रिक टन दर्शाया गया।
- दालमिया सीमेंट ने भी संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किया।
- कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 37,66,73,510 रुपये के बिल मंजूर कराने का आरोप है।
- मामले में BNS 2023 की धाराओं 212, 3(5), 316(2), 316(5), 318(3), 336(3) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
- आगे की जांच में कथित आर्थिक अनियमितता, फर्जी दस्तावेज, आरडीएफ परिवहन रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों एवं सलाहकारों की भूमिका की जांच अहम होगी।

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