संपादकीय : जब पत्रकारिता पर भारी पड़ने लगे चाटुकारिता...

जब पत्रकारिता पर भारी पड़ने लगे चाटुकारिता... 

 लालप्रताप सिंह (कार्यकारी संपादक : सा.यशोमणि) 

पत्रकारिता का अर्थ कभी सत्ता से सवाल करना, समाज की आवाज़ बनना और सच को निर्भीकता से सामने लाना था। आज भी अनेक पत्रकार इसी मूल भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। लेकिन यह भी एक वास्तविकता है कि मीडिया के एक हिस्से में निष्पक्षता की जगह चाटुकारिता, पक्षधरता और व्यक्तिगत हितों ने जगह बना ली है। यही कारण है कि जनता का भरोसा कई बार डगमगाता दिखाई देता है। 

आज का दौर ऐसा बनता जा रहा है, जहाँ सवाल पूछने वाले पत्रकार से अधिक प्रशंसा करने वाले को महत्व मिलता है। सत्ता, विपक्ष, उद्योग जगत या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के करीब रहना कई लोगों के लिए पत्रकारिता का पर्याय बन गया है। आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को विरोध और प्रशंसात्मक रिपोर्टिंग को उपलब्धि मान लेने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

पत्रकार का धर्म किसी दल, नेता या संस्था का प्रवक्ता बनना नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह रहना है। अच्छी नीतियों की सराहना करना भी पत्रकारिता है और गलत निर्णयों पर तथ्य आधारित प्रश्न उठाना भी। यदि इनमें से किसी एक पक्ष को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, तो पत्रकारिता अपना संतुलन खो देती है।

यह कहना भी उचित नहीं होगा कि पूरी पत्रकारिता चाटुकारिता में बदल गई है। आज भी अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों, आर्थिक दबाव और जोखिमों के बावजूद जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं। वही पत्रकारिता की वास्तविक ताकत हैं। इसलिए आलोचना किसी व्यक्ति या पूरे मीडिया जगत की नहीं, बल्कि उस प्रवृत्ति की होनी चाहिए जो पत्रकारिता की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को कमजोर करती है।

लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता केवल मीडिया की नहीं, समाज की भी आवश्यकता है। यदि मीडिया सत्ता से सवाल पूछना छोड़ दे, तो जवाबदेही कमजोर पड़ जाती है। यदि मीडिया केवल विरोध ही करे, तब भी संतुलन बिगड़ता है। इसलिए पत्रकारिता का मार्ग न अंध-समर्थन का होना चाहिए और न अंध-विरोध का, बल्कि तथ्यों, प्रमाणों और जनहित का होना चाहिए।

समय आ गया है कि पत्रकारिता फिर से अपनी मूल पहचान की ओर लौटे। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा सम्मान किसी सत्ता की निकटता से नहीं, बल्कि सच के साथ खड़े होने से मिलता है। पत्रकार की असली पहचान उसकी कलम की स्वतंत्रता है, न कि किसी सत्ता या प्रभावशाली व्यक्ति की कृपा।

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