अंधेरी सबवे में जलभराव का कारण बना संकरा गटर..?? वरिष्ठ समाजसेवक व पत्रकार ओ.पी. तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल..

अंधेरी सबवे में जलभराव का कारण बना संकरा गटर..?? वरिष्ठ समाजसेवक व पत्रकार ओ.पी. तिवारी ने उठाए गंभीर सवाल..

मुंबई : मुंबई के अंधेरी पूर्व स्थित न्यू नागरदास क्रॉस रोड से अंधेरी सबवे की ओर जाने वाले मुख्य नाले (गटर) की बदहाली और हर वर्ष होने वाले जलभराव को लेकर वरिष्ठ समाजसेवक एवं सरकार मान्यता प्राप्त पत्रकार ओमप्रकाश तिवारी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हर मानसून में नेता, अधिकारी और जनप्रतिनिधि जलभराव पर चिंता तो व्यक्त करते हैं, लेकिन समस्या के मूल कारण को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

ओ.पी. तिवारी का कहना है कि अंधेरी सबवे में पानी भरने का मुख्य कारण वर्षों पुराना जलनिकासी तंत्र है, जिसे कथित रूप से निर्माण कार्यों के दौरान बाधित कर दिया गया। उनके अनुसार, लगभग 20 फीट चौड़ा मुख्य गटर अंधेरी सबवे के पश्चिमी छोर से एस.बी. रोड होते हुए समुद्र की खाड़ी तक जाता है। आरोप है कि एस.बी. रोड के किनारे स्थित इस गटर के ऊपर स्लैब डाल दिए गए और निर्माण के दौरान नीचे से इसकी चौड़ाई कम कर दी गई, जिससे बारिश के पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। तिवारी ने आरोप लगाया कि इस कार्य में बिल्डर, संबंधित मनपा अधिकारी, नगरसेवक और अन्य जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि गटर के ऊपर डाले गए स्लैब हटाकर मूल चौड़ाई बहाल की जाए तथा जहां आवश्यक हो वहां अतिक्रमण या अवैध निर्माण हटाया जाए, तो अंधेरी सबवे में होने वाली जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में उन्होंने सचित्र प्रमाणों के साथ महानगरपालिका आयुक्त एवं बिल्डिंग प्रपोजल विभाग को लिखित शिकायत भेजी है। यदि शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं होती या संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने पर विचार करेंगे। ओ.पी. तिवारी ने यह भी कहा कि जनहित के मामलों में अदालत तक पहुंचना आसान नहीं होता। लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया, आर्थिक बोझ और संभावित दंड जैसी परिस्थितियां सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती बन जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे को अंत तक उठाया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की है कि अंधेरी सबवे क्षेत्र के संपूर्ण जलनिकासी तंत्र का तकनीकी सर्वे कराया जाए, गटर की वास्तविक क्षमता का आकलन किया जाए तथा यदि कहीं निर्माण के कारण जल प्रवाह बाधित हुआ है तो तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

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