वसई-विरार की गड्ढेयुक्त सड़कें बन रहीं हादसों की वजह, मनपा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर उठे सवाल...

वसई-विरार की गड्ढेयुक्त सड़कें बन रहीं हादसों की वजह, मनपा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर उठे सवाल...

वसई-विरार (लालप्रताप सिंह) : वसई-विरार शहर में बारिश के साथ ही सड़कों की बदहाल स्थिति एक बार फिर आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। शहर के अनेक प्रमुख मार्गों, आंतरिक सड़कों और रिहायशी इलाकों में बने गहरे गड्ढों के कारण प्रतिदिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जबकि पैदल चलने वाले नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष मानसून से पहले सड़क मरम्मत और गड्ढामुक्त अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में इन दावों की पोल खुल जाती है। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और जगह-जगह पानी भर जाने से गड्ढों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नागरिकों के अनुसार, नालासोपारा, वसई, विरार सहित शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कें लंबे समय से मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही हैं। कई स्थानों पर वाहन चालक गड्ढों से बचने के प्रयास में असंतुलित होकर गिर रहे हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें भी लग रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण एम्बुलेंस, स्कूल बसों और सार्वजनिक परिवहन को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।शहरवासियों ने आरोप लगाया कि वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा समय-समय पर मरम्मत कार्य किए जाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर केवल खानापूर्ति होती है। कुछ दिनों बाद वही सड़कें फिर से टूट जाती हैं, जिससे सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि शहर के जनप्रतिनिधियों को भी इस गंभीर समस्या पर राजनीति से ऊपर उठकर ठोस पहल करनी चाहिए। चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़क जैसी बुनियादी सुविधा आज भी लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन से मांग की है कि शहर की सभी प्रमुख एवं आंतरिक सड़कों का तत्काल सर्वे कराकर युद्धस्तर पर गड्ढामुक्त अभियान चलाया जाए। साथ ही, घटिया निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।शहरवासियों का कहना है कि विकास केवल घोषणाओं और शिलान्यास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सड़कें उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और जनहानि की जिम्मेदारी तय करना भी आवश्यक होगा।

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