नालासोपारा स्थित राजमाता नगर में फूटा जनता का गुस्सा, स्थानीय भाजपा नगरसेवकों को सुननी पड़ी खरी-खोटी...

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"जब हम परेशानी में थे तब कोई नहीं आया, अब काम होने के बाद सिर्फ दिखावा करने पहुंचे" — स्थानीय नागरिकों का आरोप...

नालासोपारा : नालासोपारा पूर्व के राजमाता नगर क्षेत्र में स्थानीय समस्याओं को लेकर रहवासियों का आक्रोश उस समय खुलकर सामने आ गया, जब क्षेत्र में पहुंचे स्थानीय भाजपा नगरसेवक एवं नगरसेविकाओं का नागरिकों ने तीखे शब्दों में विरोध किया। लोगों का आरोप था कि जब पूरा इलाका गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था, तब जनप्रतिनिधियों ने न तो क्षेत्र का दौरा किया और न ही लोगों की सुध ली। अब जबकि स्थानीय नागरिकों ने अपने स्तर पर समस्या का समाधान कर लिया है, तब जनप्रतिनिधि केवल "शो-शाइनिंग" और राजनीतिक प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी विभिन्न समस्याएं बनी हुई थीं। कई बार संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर रहवासियों ने स्वयं एकजुट होकर समस्या के समाधान का प्रयास किया। इसी बीच जब स्थानीय भाजपा के नगरसेवक एवं नगरसेविकाएं क्षेत्र में पहुंचे तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "जब हम परेशान थे तब आप लोगों ने एक बार भी हमारी खबर नहीं ली। अब जब हमने अपना काम खुद कर लिया तो केवल फोटो खिंचवाने और श्रेय लेने के लिए यहां आ गए हैं..??" घटना के दौरान कुछ समय तक तीखी बहस का माहौल बना रहा। उपस्थित लोगों ने जनप्रतिनिधियों से नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करने, नागरिकों की समस्याएं सुनने और समय पर उनका समाधान सुनिश्चित करने की मांग की। लोगों का कहना था कि चुनाव के समय किए गए वादे धरातल पर दिखाई नहीं देते और जनप्रतिनिधियों को केवल चुनावी मौसम में ही जनता की याद आती है। राजमाता नगर की इस घटना ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही केवल उद्घाटन और औपचारिक दौरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि संकट के समय जनता के बीच उपस्थित रहकर उनकी समस्याओं का समाधान कराना ही उनकी वास्तविक जिम्मेदारी है।

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