अगर पानी चाहिए, तो लिखकर दीजिए कि घर अनाधिकृत है - वसई विरार शहर मनपा
अगर पानी चाहिए, तो लिखकर दीजिए कि घर अनाधिकृत है...!!
वसई-विरार शहर मनपा का अजब-गजब आदेश, नागरिकों में नाराज़गी.....
विरार : वसई-विरार शहर महानगरपालिका के एक कथित आदेश ने शहर में विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि पानी के नए कनेक्शन या नियमित जलापूर्ति की मांग करने वाले नागरिकों से एक ऐसा शपथपत्र (अंडरटेकिंग) मांगा जा रहा है, जिसमें उन्हें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनका घर अथवा निर्माण “अनाधिकृत” (अवैध) है। इस शर्त को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। नागरिकों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा प्राप्त करने के लिए अपने ही घर को अनाधिकृत घोषित करने का दबाव बनाना अन्यायपूर्ण है। कई रहिवासियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से वे संपत्ति कर और अन्य शुल्क भरते आ रहे हैं, लेकिन अब जल कनेक्शन के लिए उन्हें ऐसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा है, जिससे भविष्य में कानूनी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि पेयजल जैसी आवश्यक सेवा को किसी भी प्रकार की विवादित शर्त से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी निर्माण की वैधता को लेकर प्रशासन के पास आपत्ति है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।विरोध कर रहे नागरिकों ने महानगरपालिका प्रशासन से इस शर्त को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी का अधिकार प्रत्येक नागरिक की मूल आवश्यकता है और इसे किसी प्रकार के दबाव का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।इस बीच, मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि महानगरपालिका को नागरिक हितों को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी और न्यायसंगत नीति अपनानी चाहिए। फिलहाल, इस मुद्दे पर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, बढ़ते विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में इस विषय पर प्रशासन को अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु
जल कनेक्शन के लिए कथित रूप से “घर अनाधिकृत है” लिखित स्वीकारोक्ति मांगी जा रही है।
नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने फैसले का विरोध किया।
पानी जैसी मूलभूत सुविधा को विवादित शर्तों से जोड़ने पर सवाल।
प्रशासन से आदेश वापस लेने और स्पष्ट नीति बनाने की मांग।
मामला शहर में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।

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