नेतृत्व कमजोर पड़ने पर जनप्रतिनिधि नए रास्ते चुनते हैं : संजय निरुपम
नेतृत्व कमजोर पड़ने पर जनप्रतिनिधि नए रास्ते चुनते हैं : संजय निरुपम
मुंबई : शिवसेना (शिंदे गुट) के उपनेता संजय निरुपम ने शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि नेतृत्व के प्रति बढ़ते असंतोष की स्वाभाविक परिणति है। गुरुवार को आयोजित पत्रकार परिषद में निरुपम ने कहा कि संसद की कार्यवाही से संबंधित व्हिप का एक निश्चित संवैधानिक और कानूनी दायरा होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जिस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है, उसका कोई ठोस कानूनी आधार दिखाई नहीं देता। संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की सही जानकारी रखने वालों को जनता को भ्रमित करने के बजाय तथ्यों पर आधारित चर्चा करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में जब सांसद, विधायक और पदाधिकारी लगातार पार्टी छोड़ने लगते हैं, तो यह संगठन और नेतृत्व दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय होता है। निरुपम के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर शिवसेना से जुड़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संजय राऊत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अक्सर आक्रामक और विरोधाभासी बयान देते हैं। निरुपम ने कहा कि जिन सांसदों की कुछ समय पहले तक प्रशंसा की जा रही थी, आज उन्हीं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग किया जा रहा है, जो राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। निरुपम ने वर्ष 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कई तरह की चेतावनियां और दावे किए गए थे, लेकिन बाद की परिस्थितियों ने उन दावों को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में धमकियों और भय की राजनीति नहीं, बल्कि जनसमर्थन और संगठनात्मक क्षमता का महत्व होता है।

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