भ्रष्टाचार और दहशत के दम पर पहाड़ों को निरंतर चीरते हुए अवैध निर्माण की ओर अग्रसर हो रहा वाघराल पाड़ा...
दूसरा धारावी बनने को तैयार है वसई पूर्व, भोयदापाड़ा स्थित वाघराल पाड़ा...
पहाड़ों को निरंतर चीरते हुए अवैध निर्माण की ओर अग्रसर हो रहा वाघराल पाड़ा...
प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे भूमाफिया...
स्थानीय नेताओं और प्रशासकीय अधिकारियों की।कार्यप्रणाली संदेहास्पद......
वाघराल पाड़ा में रोजाना 15 से 20 रूम / गालों का हो रहा निर्माण...प्रशासकीय अधिकारी मौन धारण कर देख रहे हैं तमाशा....
वसई (लालप्रताप सिंह) : वसई विरार शहर मनपा प्रभाग समिति जी कार्यक्षेत्र भोयदा पाड़ा स्थित वाघराल पाड़ा में पर्यावरण को क्षति पहुंचाते हुए पहाड़ों को चीरकर वन्य जीवों व हरे भरे वृक्षों का समूल विनाश करते हुए भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी के बलबूते बड़े पैमाने पर अवैध चालियों का निर्माण कार्य वर्षों से किया जा रहा है।
जहां पर कार्रवाई करने के नाम मात्र से ही वन / मनपा अधिकारियों को पसीने छूटने लगते हैं। स्थानिकों की माने तो उक्त स्थल पर कार्रवाई न करने के पीछे भूमाफियाओं / अवैध निर्माणकर्ताओं का डर तो है ही साथ ही साथ यहां से अधिकारियों को नजराने के तौर पर मिलनेवाली एक मुश्त रकम भी है..?? जिसके चलते क्षेत्र में बेखौफ अवैध कार्यों को अंजाम दिया जाता है और अधिकारी मुकदर्शक बने रहते हैं..?? तमाम शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य बटा सन्नाटा..?? ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वसई विरार शहर में गुंडाराज हैं..?? जिसके चलते प्रशासकीय अधिकारी भूमाफियाओं / अवैध निर्माणकर्ताओं की जी हुजूरी बजाने के लिए मजबूर हैं..?? यदि यहां कानून राज होता तो जिस प्रकार से क्षेत्र में दहशत का माहौल है वैसा नहीं होता..?? भूमाफियाओं / अवैध निर्माणकर्ताओं पर प्रशासन का अंकुश होता..?? किंतु ऐसा कुछ नहीं है। बता दें कि पिछले 2 से 3 वर्षों में उक्त क्षेत्र में कई पहाड़ों को चीरकर अवैध रूप से भरनी कर कई हजार रूम / गालों का निर्माण कर दिया गया अथवा मौजूदा समय में भी यह प्रक्रिया निरंतर जारी ही है..?? जिसपर कार्रवाई करने का साहस किसी भी प्रशासकीय अधिकारी को नहीं है..?? सूत्रों की माने तो इस अवैध कारोबार में क्षेत्रीय नेताओं से लेकर मंत्रालय तक अथवा उच्च अधिकारियों तक सभी की मिलीभगत है..?? हालांकि अब देखना यह दिलचस्प होगा कि मामला उजागर होने के बाद क्या क्षेत्र में प्रशासन का बुलडोजर चलेगा या फिर कान में तेल डालकर कुंभकर्णी नींद सोए ही रहेंगे..?? फिलहाल यह आनेवाले समय में ही मालूम होगा।






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