वसई विरार शहर मनपा में महापौर से लेकर अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए मची हुई है होड़, बविआ नेता हितेंद्र ठाकुर पर दबाव बनाने का हो रहा प्रयास
वसई विरार शहर मनपा में महापौर से लेकर अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए मची हुई है होड़, बविआ नेता हितेंद्र ठाकुर पर दबाव बनाने का हो रहा प्रयास...
विरार : इस बार महापौर पद के लिए सामान्य वर्ग आरक्षित होने से कई उम्मीदवारों की उम्मीदें टूट गई हैं और उन्होंने लॉबिंग शुरू कर दी है। विभिन्न माध्यमों से बविआ नेता हितेंद्र ठाकुर पर दबाव बनाना शुरू हो गया है। ऐसा लगता है कि उम्मीदवार सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल महापौर पद के लिए दावा पेश करने में कर रहे हैं। हालांकि, चौंकाने वाले फैसले लेने में माहिर ठाकुर ने महापौर पद को अपने पास गुलदस्ते में ही रखा है। चुनाव परिणामों के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि वसई-विरार शहर मनपा में महापौर बहुजन विकास अघाड़ी से ही होंगे। हालांकि, शहर में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस बार महापौर पद अनुसूचित जाति (महिलाओं) के लिए आरक्षित होगा। चूंकि आरक्षण लॉटरी में महापौर का पद सामान्य श्रेणी के लिए है, इसलिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ गई है। बविआ नेता हितेंद्र ठाकुर ने कई वरिष्ठ पार्षदों को अपने पक्ष में कर लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वरिष्ठ पार्टी नेताओं और पार्षदों को विश्वास में लेकर महापौर का चुनाव किया जाएगा। उन्होंने अभी तक किसी का नाम उजागर नहीं किया है। वहीं दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि राजनीति में चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए वसईकरों में मशहूर हितेंद्र ठाकुर एक बार फिर महापौर पद के चुनाव में सबको चौंका सकते हैं। फिलहाल, बहुजन विकास अघाड़ी सत्ता में है।महापौर जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए होड़ मची हुई है और सोशल मीडिया पर संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा हो रही है। विरार पूर्व, वसई पश्चिम, नालासोपारा पश्चिम और नायगांव पश्चिम के पार्षदों के नाम सुर्खियों में हैं। वहीं, बविआ से कुछ उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। ये नेता अपने समर्थकों के माध्यम से अपने नाम सुर्खियों में लाकर पार्टी के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मनपा में न केवल महापौर, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए भी बविआ नेताओं के बीच होड़ मची हुई है। स्वीकृत पार्षद और सभागृह नेता के पदों पर किसे नियुक्त किया जाएगा, इस पर सबकी नजर टिकी है। स्थायी समिति के अध्यक्ष पद के लिए प्रतिस्पर्धा सबसे अधिक है। स्थानीय पार्षदों ने नौ वार्ड समितियों के अध्यक्ष पदों के लिए भी होड़ शुरू कर दी है।

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