प्रशासनिक अधिकारियों के अनदेखी के चलते विरार क्षेत्र में चल रहे पटाखा कंपनी में हो सकता है विस्फोट
प्रशासनिक अधिकारियों के अनदेखी के चलते विरार क्षेत्र में चल रहे पटाखा कंपनी में हो सकता है विस्फोट
विरार (लालप्रताप सिंह ) : देश में आए दिन पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट के मामले सामने आ रहे हैं अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के हरदा में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था, जहां पर कई लोगों की जान चली गई थी और लगभग 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। आज उत्तरप्रदेश में प्रयागराज कानपुर हाईवे पर एक पटाखा कंपनी में विस्फोट हुआ, जहां पर दर्जनों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।इन विभिन्न हादसों के होने के बावजूद भी वसई विरार शहर मनपा प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सो रही है।बता दें कि वसई विरार शहर महानगरपालिका व विरार पुलिस स्टेशन क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नारंगी, गणपति मंदिर,चंदनसार रोड विरार पूर्व स्थित रिहायशी क्षेत्र में मर्चेंट इंटरप्राइजेज नामक पटाखा कंपनी पर शासन प्रशासन के बगैर अनुमति के फुलझड़ियाँ, फ्लैश पाउडर पटाखे, डबल साउंड पटाखे, दिवाली पटाखे, दुर्गा पटाखा डीलर आदि पटाखे का बेख़ौफ़ उत्पादन कर बेचा जा रहा है.ऐसे मे आस-पास के क्षेत्र में आगजनी की वारदात घटित हो सकती है जिससे बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान होने की संभावना बनी हुई है। जिसकी शिकायत अग्निशमन विभाग के सबंधित अधिकारी अथवा मनपा में आसीन उपायुक्त (अग्निशमन विभाग) पंकज पाटिल से लगातार की जा रही है। किंतु पंकज पाटिल द्वारा मर्चेंट इंटरप्राइजेज कंपनी पर कोई कार्यवाई नही की जा रही है..?? बल्कि उनके द्वारा लगातार गुमराह किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो उक्त कारोबार में चोरी की बिजली का भी बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में बिजली विभाग को भी सजग होकर जांच करने की आवश्यकता है। प्रशासनिक अधिकारियों को जहां मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से कार्यवाई करनी चाहिए वहीं प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जिससे लोगों में यह संशय उतपन्न हो रहा है कि कहीं उक्त कारोबार प्रशासनिक अधिकारियों की ही देखरेख में तो फलफूल नही रहा है..??
जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश के हरदा में हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में आसपास के घरों को भी अच्छी-खासी क्षति हुई थी। ऐसा इसीलिए हुआ था क्योंकि फैक्ट्री घरों के आसपास ही थी और किसी ने इसकी चिंता नहीं की कि हादसे की स्थिति में जान-माल की क्षति कहीं अधिक हो सकती है। वहां पर भी विरार स्थित मर्चेंट इंटरप्राइसेस कंपनी की ही तरह मनमाने तरीके से पटाखों का भंडारण किया जा रहा था। यह भंडारण इतने बड़े पैमाने पर किया गया था की लगभग आधे घंटे तक धमाके होते रहे और इलाके में अफरातफरी फैल गई। हादसे की गंभीरता का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि आसपास के कई शहरों से वहां अग्निशमन गाड़ियों को बुलाना पड़ा था। इसमें कोई संदेह नहीं कि भीषण हादसे का शिकार बनी पटाखा फैक्ट्री सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके चलाई जा रही थी। यह अनदेखी इसके बाद भी हो रही थी कि कथित तौर पर फैक्ट्री का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता था। कोई भी समझ सकता है कि फैक्ट्री के निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति की जा रही होगी। संबंधित विभाग के अधिकारी कागजों में यह दर्ज करके कर्तव्य की इतिश्री कर लेते होंगे कि फैक्ट्री तय मानकों के हिसाब से चलाई जा रही है। जैसे कि वसई विरार शहर में चल रहा है। फैक्ट्रियों, होटलों आदि के साथ सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा के मामले में हमारे देश में ऐसा ही होता है।निरीक्षण के नाम पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी ही की जाती है। इसी कारण देश में वैसे हादसे लगातार होते ही रहते हैं, जैसा की हरदा व उत्तर प्रदेश में हुआ। इन हादसों में तमाम लोग मारे जाते हैं और शासन-प्रशासन के साथ देश की भी बदनामी होती है, लेकिन कोई जरूरी सबक सीखने से इंकार किया जाता है। स्थिति यह है कि जांच और कार्रवाई के नाम पर भी लीपापोती होती है और जिम्मेदार लोग मुश्किल से ही जवाबदेह बनाए जाते हैं। एक ऐसे समय जब देश को विकसित बनाने की कोशिश हो रही है, तब यह देखना दयनीय है कि इस पर निगाह नहीं लगाई जा रही है कि कार्यस्थलों, सड़कों, सार्वजनिक आयोजनों आदि में सुरक्षा के सामान्य नियमों की उपेक्षा ही अधिक होती है। जब देश के बड़े शहरों में ऐसा होता है, तब यह अनुमान लगाना कठिन नहीं कि अन्य गांव व शहरों में क्या होता होगा?? आखिर कब चेतेंगे हम..?? और यह कब देखेंगे की विकासशील देश में सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों का पालन कहीं अधिक संतोषजनक है.?? कम से कम अब तो यह समझा ही जाना चाहिए कि सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों की अनदेखी देश की प्रगति में एक बड़ी बाधा है। ध्यान रहे कि अपने यहां जैसे सुरक्षा मानकों की उपेक्षा की जाती है, वैसे ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की भी परवाह नहीं की जाती..??


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